अगले जन्म में क्या बनेंगे बताएंगे आपके कर्म, गरूड़ पुराण में है उल्लेख

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कहते है कर्म का फल व्यक्ति को हमेशा ही भोगना पड़ता है। यह बात सत्य भी है क्योंकि इसका उल्लेख गरूड़ पुराण में विस्तार से है। गरूड़ पुराण के मुताबिक व्यक्ति के कर्म ही उसके भविष्य को तय करते है।

चाहे वर्तमान हो या भविष्य। इतना ही नहीं बल्कि आने वाला जन्म कैसा होगा क्या होगा। इसका भी उल्लेख गरूड़ पुराण में है। इस लेख के माध्यम से हम गरूड़ पुराण के दस महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख करेंगे।

गरूड़ पुराण में अच्छे व बुरे दोनों की कर्मों का उल्लेख किया गया है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि गरूड़ पुराण में अपराधों की सजा भी तय है।

गरूड़ पुराण में लिखा है कि श्री कृष्ण से गरूड़ जी पूछते है कि हे भगवन मुझे बताइए कि किस पाप से क्या-क्या चिन्ह प्राप्त होते है और पापियों को क्या सजा मिलती है।

भगवान श्रीकृष्ण ने गरूड़ को बताया कि इस जन्म के पापों का फल अगले जन्मों में भी मिलता है। हिन्दू धर्म में 18 पुराणों में से एक है गरूड़ पुराणा। जिसका अपना ही एक अलग महत्व है।

रेप करने वाले को मिलती है यह सजा

गरूड़ पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति दोस्त की स्त्री के साथ दुष्कर्म करता है वह अगले जन्म में गधा बनता है। नाबालिक से दुष्कर्म करने वाले अगले जन्म में अजगर योनि में जन्म लेते है।

गुरु की पत्नी के संग सहवास की इच्छा रखने वाला पापी अगले जन्म में गिरगिट बनता है। सगोत्र की स्त्री संग व्यभिचार करने वाला कामुक व्यक्ति मरु प्रदेश में पिशाच बनकर भटकता है।

रोगी से दुष्कर्म करने वाला युवक अगले जन्म में नपुंसक होता है। कुकर्म करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में सुअर की योनि में जन्म लेता है।

स्त्री को चोट पहुंचाने वाला या फिर गर्भपात कराने वाला व्यक्ति अगले जन्म में भिल्ल बनता है।

पर पुरुष से संबंध रखने वाली स्त्रियों को भोगना होता है यह परिणाम

सास को गाली देने वाली नित्य कलह करने वाली स्त्री अगले जन्म में जलोका होती है। जो स्त्री अपने पति के बजाए पर पुरुष का सेवन करती है वह स्त्री अगले जन्म में चमगादड़ी बनकर पेड़ों पर लटकी रहती है। बाद में उसे दो मुखी सर्पिणी की योनि में जन्म मिलता है।

बीवी को छोड़ने का परिणाम

जो पुरुष द्वेष देखकर पत्नी को छोड़ देता है वह लंबे समय तक चक्रवाक पक्षी बनकर रहता है। पिता, गुरु, बहन और अपने सगे-संबंधियों से द्वेष रखने वाला हजारों जन्म तक पर्वत के गर्भ में जन्म पाता है।

चोरी करने वाले को भोगना पड़ता है यह फल

दूसरे की पत्नी को चुराने वाला किसी की धरोहर को अपहरण करने वाला, ब्राम्हण के धन को हड़पने वाला नरक के दुख भोगने के बाद ब्रम्हराक्षस की योनि में जाता है।

कपट से प्रेम रखकर ब्राम्हण के धन को लूटने वाले के कुल का नाश चंद्रमा और तारागण के रहने तक होता है।

फल-फूल को चुराने का होता है यह परिणाम

तांबूल, फल तथा फूल आदि की चोरी करने वाला अगले जन्म में बंदर बनता है। जूता, घास और कपास को चुराने वाला अगले जन्म में भेड़िया बनता है।

जो क्रूर कर्मों से आजीविका चलाता है। मार्ग में यात्रियों को लूटता है और जो निर्दोष जानवरों का शिकार करता है वह कसाई का बकरा बनता है।

ये पाप पहुंचाते है नरक में

हरे-भरे वन, जंगल, फसल और पेड़-पौधों को काटना और प्रकृति के नए जन्म का विनाश करना।

किसी विधवा की पवित्रता को नष्ट करना या किसी मर्द से शादी की सीमा को लांघ कर संबंध बनाना।

पत्नी और बच्चों की जरूरतों को अनदेखा करना।

पूर्वजों की उपेक्षा करना।

भगवान शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और दुर्गा जी का सम्मान नहीं करने पर।

महिला की इज्जत लूटने के इरादे से उसे शरण देना।

आग, पानी, बगीचे या गौशाला में मलमूत्र का त्याग करना।

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