यदुवंशियों के शौर्य व कला का प्रदर्शन देखने मिलेगा रावत नाच में, जाने रावत नाच के विषय में

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रावत नाच छत्तीसगढ़ प्रदेश के लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदेश में तरह-तरह के लोक रंग व लोक पंरपराएं देखने को मिलती है। उन्हीं में से एक लोक नृत्य है रावत नाच। रावत नाच यदुवंशियों के द्वारा किया जाता है।

यह उत्सव यदुवंशियों द्वारा शौर्य व कला का प्रदर्शन करने के लिए होता है। जिसमें यदुवंशी पारंपरिक वेशभूषा धारण कर अस्त्र-शस्त्र के साथ नृत्य करते व दोहे के माध्यम से संदेश देते है। इस लेख के माध्यम से हम प्रदेश के लोक नृत्य रावत नाच के विषय में बताएंगे।

रावत नृत्य यादव समुदाय का महत्वपूर्ण पारंपरिक नृत्य है। इस नृत्य में यादव समुदाय के लोग विशेष वेषभूषा पहनकर, हाथ में सजी हुई लाठी लेकर टोली में गाते और नाचते हुए निकलते है। गांव व शहर में प्रत्येक गृहस्वामी के घर में नृत्य के प्रदर्शन के बाद उनकी समृद्धि की कामना दोहे गाते हुए करते है।

रावत नाच की वेशभूषा

इसके लिए यदुवंशी पारंपरिक वेशभूषा धारण करते है। इसमें यादवों के साज-सज्जा में पैरों में घुघरु, हाथ में तेंदू की लाठी, आकर्षक रंगीन धोती, काजल का टीका, विशेष तरह की पगड़ी शामिल होती है।

वहीं इसमें खास वाद्ययंत्र भी होते है। जिसमें सिंग बाजा, गड़वा बाजा, टिमकी, मोहरी, दफड़ा, ढोलक, सिंगबाजा जैसे वाद्ययंत्र होते है।

एक पखवाड़े तक होता है आयोजन

परंपरा वर्षो पुरानी है। इस उत्सव को देवउठनी एकादशी से एक पखवाड़े तक रावत नाच करते है। जिसमें छत्तीसगढ़ी गीत गाते हुए शुभकामनाएं लोगों को देते है बिलासपुर में होता भव्य उत्सव रावत नाच की परंपरा बिलासपुर में आज से नहीं बल्कि 42 वर्षों से चली आ रही है।

यह उत्सव का 43वां वर्ष है। यह उत्सव पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान पर यह उत्सव होता है। जिसमें प्रदेश भर ये यदुवंशी शामिल होकर अपने शौर्य व कला का प्रदर्शन करते है।

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