बछबारस पर महिलाओं गाय व बछड़े की पूजा कर मांगा संतान की सुरक्षा का वरदान

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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी की तिथि को गाय-बछड़े की पूजा करने का विधान है। माना जाता है इस दिन जो भी गाय-बछड़े की पूजा करता है। उस पर गौ माता की कृपा रहती है। साथ ही संतान को भी आशीर्वाद मिलता है। माहेश्वरी समाज की वरिष्ठ सदस्य किरण माहेश्वरी ने बताया कि राजस्थान में बछ बारस का विशेष महत्व माना जाता है।

इस दिन बाजरा, चना, मोठ, सत्तू का लड्डू गाय को देते है। सभी सदस्य भी यही चीजे खाते है। इस दिन चाकू से कुछ भी नहीं काटा जाता है। घर में गोबर का तालाब बनाकर पूजा करने का विधान है। संतान के लंबी आयु के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है। माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने भी इस पूजा को विधिवत किया। गाय-बछड़े की पूजा की।

इसके बाद भोग अर्पित कर कथा का श्रवण किया। गो ग्रास सुबह व शाम में दिया। वहीं घर के पास गौ शालाा में पहुंचकर वहां पर गाय की सेवा की गई। साथ ही कुछ अन्न भी दान में दिया गया।


इस पर्व के माध्यम से अपने आने वाली पीढ़ी में अच्छे संस्कार व अपनी संस्कृति के महत्व को बताना उद्देश्य है। ताकि सभी अपनी संस्कृति व सभ्यता को जाने, समझे और पोशित हो।

इस अवसर पर गीता, किरण, ममता, नीता, आरती, सरिता, सोनाली, रेखा, उमा, संगीता, पूजा, नमिता, सुजाता सहित समाज की महिलाएं उपस्थित रही। सभी ने विश्व के कल्याण की भ कामना की। साथ ही ओम सुरभी नमः मंत्र का जाप करते हुए कोरोना संक्रमण से बचाए रखने का आशीर्वाद मांगा।


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