ससुर की इच्छा से बहु ने पति के साथ दिया उनकी अर्थी को कंधा, जाने पूरी बात

1

समाज में बेटे और बेटी को तो अपने पिता के प्यार व दुलार का हकदार माना जाता है। साथ ही उनके सुख-दुख में भी उन्हें ही आगे रखा जाता है। वहीं कई बार समाज की परंपरा से हटकर बेटी द्वारा पिता या माता को मुखाग्नि देने की बातें तो कई बार सुनी व देखी है।

लेकिन बिलासपुर में एक परिवार ऐसा रहा जहां पर ससुर की मौत होने पर बहु ने एक अच्छी बहु बनकर उनकी अर्थी को कांधा दिया। इस कार्य में उनके पति का सहयेाग रहा। ऐसा पहली बार हुआ जहां एक बहु ने ससुर की अर्थी को कंधा दिया।

बिलासपुर शांति नगर निवासी केन्द्रीय अध्यक्ष स्वर्णकार समाज व विधि काॅलेज के प्रोफेसर रह चुके खेमनाथ स्वर्णकार की 6 सितंबर को मृत्यु हो गई। जिनकी अंत्येष्ठी मुक्तिधाम सरकण्डा में किया गया।

ससुर की इच्छा थी कि उनकी बहु को हर काम में साथ रखा जाए। इस वजह से जब उनका देहांत हुआ तो बेटे अशोक ने अपनी पत्नी राधिका को अर्थी को कांधा देने कहा। पिता की इच्छा को पूरा कर समाज में सराहनीय कार्य किया।

अच्छी बहु का निभाया फर्ज

चांपा की बेटी है राधिका स्वर्णकार। उसका विवाह बिलासपुर के अशोक स्वर्णकार से हुआ। राधिका पति के साथ अपने सास-ससुर की सेवा करते हुए जीवन बिताया। एक अच्छी बहु की तरह सास-ससुर की खूब सेवा की।

जिससे सास व ससुर दोनों को ही लगाव खूब था। ऐसे में ससुर की इच्छा थी कि बेटा हर कार्य में बहु को रखे। साथ जब उनकी मृत्यु हो तो बहु उनके अर्थी को कांधा दे। पिता की इच्छा को पूरा करते हुए अशोक ने पत्नी राधिका से अर्थी को कंधा देने को कहा।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here