प्रथम पूज्य गणेश को क्यों नहीं अर्पित किया जाता तुलसी पत्र, जाने कारण

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जब भी पूजन कार्यक्रम होता है तब वहां पर तुलसी पत्र को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। तुलसी पत्र के महत्वपूर्ण होने के बाद भी एक एेसे देव है जिनकी पूजा में न तो तुलसी पत्र अर्पित होता है और न ही तुलसी मंजरी।

वह देव है प्रथम पूज्य भगवान गणेश। आखिर भगवान गणेश के पूजन में ही तुलसी पत्र को शुभ क्यों नहीं माना जाता है। इसका कारण इस लेख के माध्यम से बताने जा रहे है।

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इस वजह से दिया भगवान गणेश ने तुलसी को श्राप

भगवान गणेश एक बार तप में लीन थे और उस समय तुलसी तीर्थ यात्रा करते हुए अपने लिए योग्य वर का चुनाव करने भ्रमण कर रही थी। तब भगवान गणेश को तप करता देख तुलसी भगवान गणेश पर मोहित हो गई और उनसे ही विवाह करने की इच्छा कर ली।

इसके बाद भगवान की तपस्या भंग कर विवाह करने की इच्छा जाहिर की। तब भगवान ने विवाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और स्वयं के ब्रह्माचारी होने की बात बताई।

विवाह न करने से मना करने के कारण भगवान गणेश को तुलसी ने श्राप दे दिया था कि तुम मुझसे विवाह नहीं कर रहे हो तुम्हारा दो विवाह होगा। तुलसी ने जब भगवान को श्राप दिया तब भगवान गणेश ने भी तुलसी को श्राप दिया कि तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा।

एक राक्षस से विवाह होने का श्राप सुनकर तुलसी ने गणेश से माफी मांगी। तब गणेश ने कहा तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण से होगा।

तुम भगवान विष्णु को प्रिय होने के साथ ही कलियुग में मोक्ष देने वाली होगी। लेकिन मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। इसी वजह से गणेशजी की पूजा में तुलसी नहीं अर्पित की जाती है।

भगवान गणेश के श्राप से ही शंखचूड से हुआ विवाह

देवी तुलसी का विवाह भगवान गणेश के द्वारा दिए गए इस श्राप के कारण ही शंखचूड से विवाह हुआ था। इसके बाद ही तुलसी को वास्तविक रूप से मोक्ष की प्राप्ति हुई और वह हरि प्रिया बनी।

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7 COMMENTS

  1. धार्मिक कथाओं से जुड़ी इस जानकारी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

    • धार्मिक जानकारी को इतनी अच्छी तरह से प्रस्तुत करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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