सूर्य देव को क्यो किया जाता है जल अर्पित, जाने कारण

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हिन्दू धर्म में समस्त देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। माना जाता है कि प्रत्येक देव प्रकृति से जुड़ा होता है और किसी न किसी तरह से हमारे जीवन के लिए हितकर माना जाता है।

जिसके कारण प्रत्येक देव की पूजा-अर्चना करने का विधान है। उसी तरह से नौ ग्रहों को भी देव माना गया है। इनकी पूजा के लिए खास विधि व वस्तुएं तय की गई है। विधिवत पूजन करने से प्रत्येक देव का आशीर्वाद मिलता है।

ग्रहों के राजा के तौर पर सूर्य देव को जाना जाता है। आइए आज सूर्य देव के पूजन से संबंधित कुछ बातों को जानते है। आखिर सूर्य देव को जल अर्पित करने का विधान का क्या महत्व है। इस लेख से सूर्य देव के पूजन व उसके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारण को जानते है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव सभी ग्रहों के स्वामी है। हर दिन सूर्य को जल चढ़ाने का महत्व माना जाता है। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए नियमित रूप से जल अर्पित किया जाता है।

मान्रूता है कि सूर्य की आराधना से भाग्योदय होता है। इनकी आराधना जल अर्पित करते हुए ही की जाती है।

रविवार है सूर्य देव की आराधना का दिन

हिन्दू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित किया जाता है। इसी तरह रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया जाता है।

यदि पूरे सप्ताह सूर्य देव को जल अर्पित नहीं कर सकते है तो रविवार के दिन करना भी लाभदायक माना जाता है। रविवार को सूर्यवार भी माना जाता है।

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शारीरिक परेशानी होती है दूर

मान्यता है कि भगवान सूर्य को स्नान करने के बाद लज्जा वस्त्र धारण किए ही पुरुष जल अर्पित करते है। इसके लिए कहा गया है कि जो जल जमीन पर गिरकर हमारे बदन पर छिटों के रूप में लगता है वो सूर्य की

किरणों से प्रभावित होता है। उस जल में कई शारीरिक परेशानियों को खत्म करने की क्षमता होती है। सूर्य की किरणों को प्राकृतिक इलाज माना जाता है। साथ ही माना जाता है कि जल चढ़ाने से शरीर निरोग रहता है।

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