नंदी के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है महादेव का शिवलिंग, जाने पूरी कहानी

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भगवान शंकर को भोलेनाथ कहा जाता है। महादेव एक एेसे देव है जिनकी पूजा देवता, दानव, मनुष्य व जीव-जंतु भी करते है। शिव को देवों का देव महादेव भी कहा जाता है।

भगवान के निटक पशु-पक्षी व भूत-पिशाच भी होते है। इन सब में भोलेनाथ के सबसे निकट व खास नंदी बैल को मना जाता है।

किसी भी शिवालय में पहुंच जाए महादेव के साथ नंदी भी विराजमान होते ही है। आखिर नंदी बैल महादेव के सबसे प्रिय भक्त क्यों है और क्यों उनके बिना महादेव की मूर्ति अधूरी मानी जाती है। आइए इस लेख के माध्यम से पूरी कहानी जानते है।

यह है पूरी कहानी

शिव पुराण के मुताबिक शिलाद मुनि ने ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए मुनि योग और तप में जीवन जीने का फैसला किया था। इससे वंश समाप्त होता देख उनके पितर चिंतित हो गए और उन्होंने शिलाद को वंश आगे बढ़ाने के लिए कहा।

मगर तप में व्यस्त रहने के कारण शिलाद गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने संतान की कामना के लिए इंद्र देव को तप से प्रसन्न कर जन्म और मृत्यु के बंधन से हीन पुत्र का वरदान मांगा।

परंतु इंद्र ने यह वरदान देने में असमर्थता प्रकट की और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कहा। भगवान शंकर ने शिलाद मुनि के कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं शिलाद के पुत्र के रूप में प्रकट होने का वरदान दिया।

कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को एक बालक मिला। जिसका नाम उन्होंने नंदी रखा। उनको बड़ा होते देख भगवान शंकर ने मित्र और वरूण नाम के दो मुनि शिला के आश्रम में भेजे।

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जिन्होंने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि नंदी अल्पायु है। नंदी को जब यह ज्ञात हुए तो वह महादेव की आराधना से मृत्यु को जीतने के लिए वन में चला गया।

वन में उसने शिव का ध्यान आरंभ किया। भगवान शिव, नंदी के तप से प्रसन्न हुए और वरदान दिया। वत्स नंदी तुम मृत्यु के भय से मुक्त अजर और अमर हो।

भगवान शंकर ने उमा की सम्मति से संपूर्ण गणों, गणेश व वेदों के समक्ष गणों के अधिपति के रूप में नंदी का अभिषेक करवाया। इस तरह से नंदी नंदीश्वर हो गए।

बाद में मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ। भगवान शंकर ने नंदी को वरदान दिया कि जहां उनका निवास होगा वहां नंदी का भी निवास होगा। तभी से हर शिव मंदिर में शिवजी के सामने नंदी की स्थापना की जाती है।

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नंदी के कान में कहने से पूर्ण होते है मनोरथ

भगवान शिव महान तपस्वी है। इसलिए वे हमेशा समाधि में बैठे रहते है। इस वजह से माना जाता है कि नंदी के कान में जो भी मनोरथ भक्त मांगते है। वह भगवान शिव तक पहुंच जाता है और उनकी मनोकामना पूरी होती है।

नंदी भगवान शिव के वाहन भी है

सभी देवी-देवताओं का अपना अलग वाहन होता है। महादेव ने नंदी को अपने गण या वाहन के रूप में स्वीकार किया है। महादेव जहां भी जाते है नंदी पर ही सवार होकर जाते है।


6 COMMENTS

  1. धर्म से संबधित आप के लेख काबिलेतारीफ़ है, आप अगर अपने ब्लॉग में राशिफल का भी प्रकाशन करेंगे तो उचित होगा। लोगों को सारी जानकारी एक ही जगह पर मिल जाएगी।

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