क्यों वर्जित है ग्रहण काल में भोजन ग्रहण करना, जाने

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सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा करना, भोजन करना जैसे चीजों को वर्जित माना गया है। आखिर ग्रहण के दौरान एेसा क्या होता है जिससे ग्रहण में इन कार्यों को वर्जित किया गया है। मान्यतानुसार सूर्य ग्रहण के दौरान धरती पर प्रकाश कम हो जाता है। सूर्य ही धरती पर ऊर्जा का स्त्रोत है। एेसे में सूर्य का प्रकाश कम होने से हमारे आस-पास मौजूद सूक्ष्म जीव सक्रिय हो जाते है और लगातार उनकी संख्या बढ़ती है। जिसके कारण भोजन दूषित माना जाता है। इस वजह से खाने-पीने की चीजों में तुलसी पत्र डाला जाता है।

  • मान्यता यह भी है कि जब ग्रहण होता है तो सूर्य के प्रकाश के कम होने से मनुष्य के शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है। इस दौरान मनुष्य का शरीर कमजोर हो जाता है। एेसे में कुछ भी ग्रहण करने से शरीर की पाचन शक्ति उसे पचाने में कम सक्षम होती है। जिसके कारण पाचन क्रिया प्रभावित होती है। पाचन नहीं हो पाता है। इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन ग्रहण करना वर्जित माना गया है।
  • पूजा भी वर्जित
    ग्रहण काल में मनुष्य की ऊर्जा कम होती है। जिसके कारण मन भी एकाग्र नहीं होता है और पूजन के दौरान अनुकूल परिणाम नहीं मिलता है। इसलिए पूजा करना भी इस दौरान वर्जित माना गया है।

० करे ग्रहण के बाद शुद्धि
सूर्य ग्रहण के मोक्ष के बाद शुद्धि का कार्य करना अत्यंत आवश्यक होता है। इसके लिए सबसे पहले स्नान करे। स्नान करने के लिए जल में गंगा जल अवश्य डाले। इसके बाद सबसे पहले पूजा स्थल पर गंगा जल से छिडक़ाव करते हुए अपने आराध्य देव के नाम का स्मरण करते हुए मंत्र जाप करे। घर के सभी तरफ सभी कमरों में भी इस जल का छिडक़ाव करे। इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना करते हुए ग्रहण के दुष्प्रभाव से मुक्ति दिलाने की कामना करे।

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