भगवान शंकर को आखिर क्यों अर्पित करते है बेल पत्र, पढ़े इस लेख में

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शंकर भगवान की पूजा करनी तो उसमें बेल पत्र को महत्वपूर्ण माना गया है। इस बेल पत्र को अर्पित करने मात्र से ही महादेव प्रसन्न हो जाते है।

बेल पत्र को शास्त्रों में वनस्पति के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया है। महादेव स्वयं एक वैद्य है उन्हें वैद्यनाथ की उपाधि दी गई है।

इस लेख के माध्यम से बेल पत्र के उत्पत्ति से लेकर महादेव को अर्पित करने के पीछे के कारण को बताएंगे।

शिवपुराण में बेल पत्र की महिमा को विस्तार से बताया गया है। बेल के पत्ते शंकर जी का आहार माने गए है। इसलिए भक्त लोग बड़ी श्रद्धा से बेल पत्र अर्पित करते है।

शिव पूजा में बेल पत्र को बहुत जरूरी माना गया है। शिव भक्तों का विश्वास है कि पत्तों के त्रेनेत्रस्वरूप् तीनों पर्णक शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय है।

बेल पत्र के वृक्ष को श्री वृक्ष कहा जाता है। बेल पत्र को शिवद्रुम भी कहा जाता है।

वनस्पति है बिल्म पत्र

बेल पत्र हमारे लिए उपयोगी वनस्पति है। यह हमारे कष्टों को दूर करती है। भगवान शिव को चढ़ाने का भाव यह होता है कि जीवन में हम भी लोगों के संकट में काम आए।

दूसरों के दुरूख के समय काम आने वाला व्यक्ति या वस्तु भगवान शिव को प्रिय है। सारी वनस्पतियां भगवान की कृपा से ही हमें मिली है।

इसलिए हमारे पेड़ों के प्रति सद्भावना होती है। यह भावना पेड़.पौधों की रक्षा व सुरक्षा के लिए स्वतरू प्रेरित करती है।

कैसे आया बेल का वृक्ष धरती पर

स्कंद पुराण में बेल पत्र की उत्पत्ति के संबंध में जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक एक बार देवी पार्वती ने अपनी ललाट से पसीना पोंछकर फेंका।

जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरी। जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ। इस वृक्ष की जड़ों में गिरिजा, तना में महेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी, पत्तियों में पार्वती, फूलों में गौरी का वास माना गया है

नहीं होता है बासी

बेल पत्र एक एेसा पत्ता है जो कभी भी बासी नहीं होता है। भगवान शंकर की पूजा में विशेष रूप से प्रयोग में लाए जाने वाले इस पावन पत्र के बारे में शास्त्रों में कहा गया है

कि यदि नया बेलपत्र न उपलब्ध हो तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर कई बार पूजा में प्रयोग किया जा सकता है।

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