भगवान श्री कृष्ण को किसने दी थी बांसुरी, जाने यहां

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भगवान श्री कृष्ण का जब स्मरण करते है। तो उनके चेहरे पर मुस्कान, सुंदर वस्त्र-आभूषण पहने हुए नजर आते है। वहीं इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट पर मोर का पंख सुशोभित होता है। तो वहीं भगवान श्री कृष्ण के पास हमेशा से ही बांसुरी होती है। बांसुरी बजाना उन्हें बहुत पसंद है। इस लेख के माध्यम से हम बांसुरी बजाने व बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण के पास कैसे आई इसकी जानकारी देंगे।
भगवान श्रीकृष्ण की जब भी पूजा की जाती है। तो उन्हें मोर पंख व बांसुरी माखन मिश्री के साथ अवश्य ही अर्पित करे। तब वे अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते है। भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुष है उनकी लीला को कोई समझ नहीं पाया है। उनकी लीला अपरमपार है।

भगवान को शिव जी ने दिया है तोहफा

द्वापरयुग के समय जब भगवान श्रीहरि विष्णु श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे तब सभी देवी-देवता वेश बदलकर समय-समय पर उनसे मिलने धरती पर आने लगे। इस दौड़ में भगवान शिवजी कहां पीछे रहने वाले थे। अपने प्रिय भगवान से मिलने के लिए वह भी धरती पर आने के लिए उत्सुक हुए। परंतु वह सोच कर कुछ क्षण के लिए रूके की यदि वे श्रीकृष्ण से मिलने जा रहे है। तो उन्हें कुछ उपहार भी अपने साथ ले जाना चाहिए। अब वे यह सोचकर परेशान होने लगे कि ऐसा कौन सा उपहार ले जाना चाहिए जो भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय भी लगे और वह हमेशा उनके साथ रहे।
तभी महादेव शिव को याद आया कि उनके पास ऋषि दधीचि की महाशक्तिशाली हड्डी पड़ी है। ऋषि दधीचि वहीं महान ऋषि है जिन्होंने धर्म के लिए अपने शरीर को त्याग दिया था व अपनी शक्तिशाली शरीर की सभी हड्डियां दान कर दी थी। उन हड्डियों की सहायता से विश्वकर्मा ने तीन धनुष पिनाक, गाण्डीव, शारंग तथा इंद्र के लिए व्रज का निर्माण किया था। महादेव शिवजी ने उस हड्डी को घिसकर एक सुंदर एवं मनोहर बांसुरी का निर्माण किया। जब शिवजी भगवान श्रीकृष्ण से मिलने गोकुल पहुंचे तो उन्होंने श्री कृष्ण से मिलने गोकुल पहुंचे तो उन्होंने श्री कृष्ण को भेंट स्वरूप वह बंसी प्रदान की। उन्हें आशीर्वाद दिया तभी से भगवान श्रीकृष्ण उस बांसुरी को अपने पास रखते है।

गौ चराते वक्त बजाते थे बांसुरी

भगवान श्री कृष्ण गौ चराने जाते थे तब अपनी बांसुरी से मनमोहक व संुदर धुन बजाते थे। पुराणों में वर्णित है कि श्रीकृष्ण के बांसुरी की धुन से हर कोई मंत्र मुग्ध हो जाता था। गोपियां भी उसकी धुन सुनकर मोहित हो जाते थे।

बांसुरी से संबंधित कई मान्यताएं है

बांसुरी से संबंधित कई मान्यताएं जुड़ी हुई है। जिसमें कुछ लोग पेड़-पौधो द्वारा देने की बात कहीं जाती है तो वहीं कुछ कथाओं में राधा को प्रसन्न करने के लिए बांसुरी बजाने की बात कहीं जाती है।

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