श्रीकृष्ण के विवाह की कथा सुनाते हुए संस्कारों का महत्व बताया भागवत महापुराण कथा में

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बिलासपुर. आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस व्यास पीठासीन आचार्य अमर कृष्ण शुक्ला ने रास महारास, कंस वध , उद्धव चरित्र , गोपी गीत गायन और कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया।

गोकुल में बालकृष्ण रोज अपनी नई नई लीला से सभी ब्रज वासियों का मन मोह रहे थे।फिर एक दिन जब मथुरा जाने का समय आया तो पूरा ब्रज जैसे शोक में डूब गया ग्वाल बाल सखा गोपियां जो उनसे बिछड़ने का सोच कर ही दुखी थे

सब को समझाएं कि वे कर्म युद्ध पर जा रहे हैं ।वे कृष्ण की खुशी के लिए गोपियों ने उन्हें जाने दिया।वास्तविकता में कृष्ण ब्रज को छोड़कर तो कभी कहीं गए ही नहीं हो तो आज भी वहां निवास करते हैं ।

मथुरा में उन्होंने धर्म रूपी अत्याचारी कंस का वध कर माता-पिता सहित समस्त मथुरा वासियों को कंस के अत्याचार से मुक्त कराया । इंद्र द्वारा दिया गया गोविंद नाम प्रभु को सबसे प्रिय है यह गोविंद नाम 100 जन्मों में एक बार भी लेने से हम उस परमधाम को प्राप्त कर सकते हैं,

हमारे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। गोपी कोई स्त्री या पुरुष नहीं गोपी तो आत्मा है। जो अपनी समस्त इंद्रियों को नियंत्रित कर ले वह व्यक्ति गोपी है। गो अर्थात इंद्रियां और पी अर्थात पीना ।

नारद जी ने भक्ति सूत्र में कहा कि प्रभु को याद करते हुए हम व्याकुल हो जाए यही भक्ति है। आपका सच्चा हितैषी वो नही है जो आप को विदेश घुमाने ले जाये आप का सच्चा हितेषी तो वो है जो आप को उठा के प्रभु की कथा में ले जाए।

उद्धव चरित्र का वर्णन करते हुए कृष्ण के ब्रज प्रेम , माता-पिता के प्रेम का इतना भावुक चित्रण किया कि उपस्थित सभी श्रोता भाव विभोर हो गए। क्योंकि जिस प्रकार माता-पिता के अपनी संतान के प्रति प्रेम का चित्रण किया वो पल सबके जीवन में आया है ।

सब श्रोता गण को अपना बचपन याद आ गया। कैसे मां यशोदा कृष्ण को प्यार करती थी। जब गोपिया उलाहना देने आती तो कभी कृष्ण को डाँटती तो कभी उन गोपियों को जो झूठा उलाहना देने आई है।

कैसे मां अपने हाथों से कृष्ण को भोजन कराती थी , अपने आंचल से उनका मुख पूछती थी , कैसे नंद बाबा ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया और कैसे थका जान कर कृष्ण को अपनी गोद में उठा लेते।उद्धव ज्ञानी है, उन्हें प्रेम की शिक्षा देने के लिए कृष्ण ने उन्हें गोकुल भेजा था।

प्रभु को ज्ञान से नहीं अपितु प्रेम भाव से , भोलेपन से , सरलता से ही प्राप्त किया जा सकता है और जब नंद बाबा यशोदा ग्वाल बाल गोपियों से मिलते हैं उनकी विरह वेदना और दुख को देखते हैं और कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को देखते हैं

तो ज्ञान की जगह कृष्ण प्रेम हृदय में लेकर वापस आते हैं। कृष्ण को निष्ठुर शब्द से संबोधित करते हैं, इस प्रकार तो सिर्फ 1 प्रेमी भक्त ही बोल सकता है , कृष्ण उनको अपने हृदय से लगा लेते हैं और कहते हैं कि ज्ञानी की जगह मेरे चरणों में है किंतु भक्त प्रेमी का स्थान तो मेरे हृदय में है। निष्काम प्रेम भक्ति से ही भगवान की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है।

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