कौन सा फूल है किस देवता या देवी को पसंद, जाने यहां

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हिन्दू धर्म में पूजा-अर्चना अपने आराध्य को याद व स्मरण करने का सबसे अच्छा माध्यम माना गया है। लोगों के दिन की शुरुआत ही अपने आराध्य का नाम लेकर जयकारा करते हुए ही होती है।

इस लेख के माध्यम से हम देवी-देवता कौन से फूल पसंद करते है। विस्तार से बताएंगे। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि हिन्दू धम्र में विभिन्न फूलों का विशेष महत्व है।

धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आरती आदि कार्य बिना फूल के अधूरे ही माने जाते है। फूलों के संबंध में शारदा तिलक नामक पुस्तक में बताया गया है दैवस्य मस्तकं कुर्यात्कुसुमोपहितं सदा।

इसका अर्थ है देवता का मस्तक सदैव पुष्प से सुशोभित रहना चाहिए। वैसे तो किसी भी भगवान को कोई भी फूल चढ़ाया जा सकता है। लेकिन फूल देवताओं को विशेष प्रिय होते है।

इन फूलों का वर्णन विभिन्न धर्म ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि देवताओं को उनकी पसंद के फूल चढ़ाने से वे अति प्रसन्न होते है और साधक की हर मनोकामना पूरी कर सकते है।

भगवान गणेश

आचार भूषण ग्रंथ के अनुसार भगवान गणेश को तुलसीदल को छोड़कर सभी प्रकार के फूल चढ़ाए जा सकते है। पद्मपुराण आचाररत्न में भी लिखा है कि न तुलस्या गणाधिपम यानि तुलसी से गणेश जी की पूजा कभी न करे।

गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है। गणेश जी को दूर्वा बहुत ही प्रिय है। दूर्वा के ऊपरी हिस्से पर तीन या पांच पत्तियां हो तो बहुत ही उत्तम है।

भगवान शिव

भगवान शंकर को धतूरे के फूल, हर सिंगार, नागकेसर के सफेद पुष्प, सूखे कमल गट्टे, कनेर, कुसुम, आक, कुश आदि के फूल चढ़ाने का विधान है। भगवान शिव को केवड़े का पुष्प् नहीं चढ़ाया जाता है।

विष्णु भगवान

इन्हें कमल, मौलसिरी, जूही, कदंब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वासंती, चंपा, वैजयंती के पुष्प विशेष प्रिय हे। विष्णु भगवान विष्णु तुलसी दल चढ़ाने से अति शीघ्र प्रसन्न होते है।

कार्तिक मास में भगवान नारायण केतकी के फूलों से पूजा करने से विशेष रूप से प्रसन्न होते है। लेकिन विष्णु जी को आंक, धतुरा, शिरीश, सहजन, सेमल, कचंनार और गूलर अर्पित न करे।

श्रीकृष्ण

अपने प्रिय पुष्पों का उल्लेख भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में युधिष्ठिर से करते हुए श्रीकृष्ण कहते है कि मुझे कुमद, करवरी, चणक, मालती, पलाश व वनमाला के फूल प्रिय है।

मां भगवती गौरी

शंकर भगवान को चढ़ने वाले पुष्प मां भगवाती को भी प्रिय है। इसके अलावा बेला, सफेद कमल, पलाश, चंपा के फूल भी चढ़ाए जा सकते है।

लक्ष्मी जी

मां लक्ष्मी का सबसे अधिक प्रिय पुष्प कमल है। उन्हें पीला फूल चढ़ाकर भी प्रसन्न किया जा सकता है। इन्हें लाल गुलाब का फूल भी काफी प्रिय है।

हनुमान जी

इनको लाल पुष्प बहुत प्रिय है। इसलिए इन पर लाल गुलाब, लाल गेंदा, मंदार जैसे पुष्प अर्पित किए जा सकते है।

मां काली

इनको गुड़हल का फूल बहुत पसंद है। मान्यता है कि इनको 108 लाल गुड़हल के फूल अर्पित करने से मनोकामना पूर्ण होती है।

मां दुर्गा

इनको लाल गुलाब या लाल मंदार के पुष्प चढ़ाना श्रेष्ठ है।

मां सरस्वती

विद्या की देवी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सफेद या पीले रंग का फूल चढ़ाए जाते है।

सफेद गुलाब, सफेद कनेर या फिर पीले गेंदे के फूल से भी मां सरस्वती बहुत प्रसन्न होती है।

शनि देव

शनि देव को नीले लाजवंती के फूल चढ़ाने चाहिए। इसके अतिरिक्त कोई भी नीले या गहरे रंग के फूल चढ़ाने से शनि देव शीघ्र ही प्रसन्न होते है।

इन बातों का रखे ध्यान

भगवान की पूजा कभी भी सूखे व बांसी फूलों से न करे। कमल के फूल को लेकर मान्यता है कि यह फूल दस से पंद्रह दिन तक भी बासी नहीं होता।

चंपा की कली के अलावा किसी भी पुष्प् की कली देवताओं को अर्पित नहीं की जानी चाहिए।

आमतौर पर फूलों को हाथों में रखकर हाथों से भगवान को अर्पित किया जाता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। फूल चढ़ाने के लिए फूलों को किसी पवित्र पात्र में रखना चाहिए और इसी पात्र में से लेकर देवी-देवताओं को अर्पित करना चाहिए।

तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुनः भगवान को अर्पित किया जा सकता हे।

शास्त्रों के अनुसार शिवजी को प्रिय बिल्म पत्र छह माह तक बासी नहीं माने जाते है। अतः इन्हें जल छिड़कर कर पुनः शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।