दूसरे जब बोले तो उन्हें सुने, अच्छे श्रोता बने – जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर-दूसरों के बोल को गौर से सुनने की कला बनाओ और अच्छे प्रकार का श्रोता बनो। हम सभी ऐसा सोच कर बैठे होते हैं, कि हम अच्छा श्रोता है लेकिन वास्तव में हम ऐसे नहीं होते । इसलिए हम में में काफी सुधार लाने की आवश्यकता है । उक्त बातें टिकरापारा स्थित गुजराती जैन भवन में चल रहे ऑनलाइन चातुर्मास प्रवचन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कही ।


उन्होंने कहा कि सही श्रोता वह है जब कोई दूसरा व्यक्ति अपनी बातों के व्यक्त करता है। तब तक अन्य को बीच में बोलने के लिए दखल अंदाज नहीं होना चाहिए, और खुद को जल्दी से बोलने का मौका मिले ऐसा अधीर भी नहीं होना चाहिए । ज्ञानी पूर्ण सामने वाले का एक आखरी तक सुनने की चेष्टा करें वह सही होता है ।
यदि हम सामने वाले के वक्तव्य को ठीक ढंग से नहीं सुनेंगे और बीच.बीच में उनकी बातों को काटेंगे तो ऐसा व्यवहार से हम अपनी ही चरित्र और कमियों को उजागर कर रहे होते हैं। खासतौर में देखा गया है कि क्लब, किटी पार्टी, होटल आदि जगह में जहां बहुत सारे लोग एकत्र होते हैं उस जगह निरीक्षण करने से ज्ञात होगा कि वहां सभी अपनी बातें करते रहते हैं । लेकिन कोई किसी का सही ढंग से सुनता नहीं है ।केवल हल्ला-गुल्ला शोर मचाते रहते हैं ।

किसी की बातों का कोई मतलब ही नहीं रहता और हम अपने लोगों से पूछे कि क्या ऐसा हम लोग भी करते हैं तो सामने वाला यही कहेगा कि हां आप भी कभी.कभी ऐसा ही करते हो ।
ऐसी स्थिति होने वक़्ता और श्रोता को शारीरिक भ्रम भी बढ़ जाता है । तनाव, बीपी भी बढ़ जाता है। वक्ता अपनी बात ठीक ढंग से नहीं रख पाता है । इसकी वजह से सामने वाले की प्रति अभाव पैदा हो जाता है ।मानसिक तनाव उत्पन्न होता है ।


सारांश यह है कि जब भी बातें हो रही हो तो सामने वाले को अपनी पूरी बात रखने का पूरा मौका देना कि उसमें से हमें भी जानकारी मिलेगा और इससे एक दूसरे के प्रति स्नेह संबंध बनेंगेै। शांति प्राप्त होगी, सम्मान प्राप्त होगा । हर व्यक्ति को एक दूसरे से वार्तालाप करना अच्छा लगता है । बशर्ते कि वह दूसरे को सुनने वाला सही होना होगा ।

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