व्यक्ति का मूल्यांकन करते समय सिर्फ बर्ताव, हरकत और मेनर्स ही नहीं देखना-जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर- सामने वाले व्यक्ति का मूल्यांकन करते समय सिर्फ और सिर्फ उसके बर्ताव, हरकते और मेनर्स नहीं देखो उसके आगे भी देखो। बहुत से लोगों को ऐसा कहते हुए सुनते है कि उनकी बातों को दिल में मत लाओ उसे ख्याल नहीं है कि वह क्या कर रहा है। उसकी हरकतों से भी आगे बढ़कर उनके लिए कुछ कह रहे है। बस यही तो हमारे बुद्धिमता की बात है। यह बातें टिकरापारा स्थित गुजराती जैन भवन में चातुर्मास प्रवचन में जैन मुनि पंथक ने कही।
उन्होंने आगे कहा जिन परिवार में बच्चे दुआ करते है उनमें माकर देने का गुण आसानी से आ जाता है। जो आप अपने बच्चे की हरकतें को लक्ष्य में लेते ही रहते तो सच है कि हम अपने बच्चो को कभी भी प्रेम कर ही नही सकते। हालांकि उनकी हरकतें और एकदम विचित्र और हमें पसंद ना हो ऐसी होती है। अगर अच्छी रित और हरकतों को ही प्रेम भाव और स्नेह करने का मापदंड तय किया होता तो हम लोगों को भी अपने बचपन में प्रेम भाव और स्नेह मिले ना होते।


बस यही सिद्धांत को अगर छोटे बच्चों के उपरंात में विश्व के सभी प्रकार की छोटे-बड़े, अमीर-गरीब को अमल में रखें तो पूरा समग्र विश्व को खुशहाल हो सकता है। आम तौर पर अपने संपर्क में आए हुए अन्य लोगों की जीवनशैली को जो कि हमें अच्छी नहीं लगती है। उनके प्रति हम नफरत और तिरस्कार करते रहते है। ऐसी नफरत और तिरस्कार की सोच के कारण पूरे विश्व में यह तीव्रता से बढ़ती जा रही है। हालांकि इस प्रकार की दृष्टि में बहुत परिवर्तन लाने की आवश्यकता है।


ऐसी मान्यता हमेशा सभी लोगों के लिए हर अवसर में लक्ष्य लेनी चाहिए। सामने वाले को जीवन सुधार करने का मौका देना चाहिए। जैसे किसी क्लर्क अपनी किसी काम में फूर्ती नहीं दिखाता है तो हमें समझना चाहिए कि उनका आज का दि नही खराब है या तो उसे बिचारे की लाइफ ही खराब है। यदि पति अथवा पत्नी या बेस्ट फ्रेंड यदि घूर-घूर के देखता है तो सिर्फ ऐसे ही नहीं समझता कि वह तुम्हे नफरत से या गुस्से से देखता है तो ऐसे रूखे बर्ताव के पीछे हो सकता है कि उसका भरपूर प्रेम और स्नेह छुपा हुआ है। उसी समय पर आप की ओर से भी ऐसा ही प्रेम एवं स्नेह मिल रहा है। तो ऐसी अनुभूति कर रहा है।

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