फुलेरा दूज क्या है जाने महत्व व इसकी कथा विस्तार से

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फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज मनाई जाती है। होली से पहले आने वाली इस दूज से कृष्ण मंदिरों में फाल्गुन का रंग चढ़ने लगता है। इस पर्व का महत्व शादियों को लेकर भी है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि इस पर्व का महत्व शादियों को लेकर भी है।

होली से करीब पंद्रह दिन पहले शादियों का शुभ मुहूर्त समाप्त हो जाता है। जबकि फुलेरा दूज के दिन हर पल शुभ होता है। यह तिथि भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होती है। इस साल फुलेरा दूज 15 मार्च को है। फुलेरा का अर्थ है फूल, जो फूलों को दर्शाता है।

यह माना जाता है कि भगवान कृष्ण(Lord Krishna) फूलों के साथ खेलते है और फुलेरा दूज की शुभ पूर्व संध्या पर होली के त्योहार में हिस्सा लेते है। यह त्योहार लोगों के जीवन में खुशियां और उल्लास लाता है।

यह है पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में एक बार भगवान श्रीकृष्ण (Bhagwaan shri Krishna)बहुत ज्यादा बीमार पड़ गए थे। सभी दवा और जड़ी-बूटियां श्रीकृष्ण पर बेअसर हो रही थी। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को एक उपाय बताया था। जिसे सुनकर गोपियां चकित हो गई। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों से चरणामृत पिलाने के लिए कहा।

भगवान श्रीकृष्ण का मानना था कि जो उनके परम भक्त या जो उनसे सबसे ज्यादा प्रेम करता हो उसके पांव को धोने वाले जल को ग्रहण करने से वह पूर तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। दूसरी ओर गोपियां इस उपाय के निष्फल होने की चिंता में थी।

गोपियों के मन में बार-बार आ रहा था कि अगर उन्होंने अपने पांव का चरणामृत श्रीकृष्ण को पीने को दिया तो वह परम भक्त का कार्य कर देगी। लेकिन अगर कान्हा ठीक नहीं हुए तो उन्हें नरक भोगना पड़ेगा। तभी इस दौरान वहां राधा रानी आ जाती है।

श्रीकृष्ण की हालत देखकर वह गोपियों से उपाय पूछती है तो गोपियां श्रीकृष्ण के द्वारा बताया गया उपाय बता देती है। राधा जी फौरन पांव धोकर उसका चरणामृत तैयार कर भगवान श्रीकृष्ण को पिलाने के लिए आगे बढ़ जाती है। राधा यह अच्छी तरह से जानती थी कि वह क्या कर रही है।

जो बात अन्य गोपियों के लिए भय का कारण थी वहीं भय राधा को भी था लेकिन भगवान श्रीकृष्ण को वापस स्वस्थ करने के लिए नर्क जाने को भी तैयार थी। जिसके बाद राधा जी ने अपने पावं का चरणामृत श्री कृष्ण को दिया और कृष्ण जी ने वह चरणामृत ग्रहण कर लिया। जिसके बाद वह स्वस्थ हो गए। राधा ही वह थी जिनके प्यार एवं सच्ची निष्ठा से श्रीकृष्ण तुरंत ही स्वस्थ हो गए।

बनता है खास भोग

फुलेरा दूज के दिन भगवान श्रीकृष्ण के लिए स्पेशल भोग तैयार किया जाता है। जिसमें पोहा और अन्य विशेष व्यंजन शामिल है। भोजन पहले देवता को अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में सभी भक्तों में वितरित किया जाता है। इस दिन किए जाने वाले दो प्राथमिक अनुष्ठान समाज में रसिया और संध्या आरती है।

अबूझ मुहूर्त होता है फुलेरा दूज

इस त्योहार को सबसे महत्वपूर्ण और शुभ दिनों में से एक माना जाता हे। इस दिन किसी भी तरह के हानिकारक प्रभावों और दोषों से प्रभावित नहीं होता है और इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। सर्दी के मौसम के बाद इसे शादियों के सीजन का अंतिम दिन माना जाता है।

इसलिए इस दिन रिकाॅर्ड तोड़ शादियां होती है। इसका अर्थ है कि विवाह, संपत्ति की खरीदी इत्यादि सभी प्रकार के शुभ कार्यों को करने के लिए दिन अत्यधिक पवित्र है। शुभ मुहूर्त पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती है।

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