पंचक क्या है क्यों नहीं होते इस दौरान शुभ कार्य, जाने यहां

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हिन्दू पंचाग के अनुसार प्रत्येक माह में पंचक की तिथि आती है। पांच दिन आते है जिनका अलग ही महत्व होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है।

इस तरह चंद्र ग्रह का कुंभ और मीन राशि में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। यानी पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते है। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहा जाता है। मान्यता है कि पंचक में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस बार पंचक की तिथि 12 फरवरी से शुरु होकर 16 फरवरी तक रहेगी।

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पंचक में नहीं करते है ये पांच कार्य

1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना

2.मकान पर छत डलवाना

3.शव जलाना

4. पलंग या चारपाई बनवाना और दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना

5. शव दाह करना

उपाय

यदि लकड़ी खरीदना अनिवार्य हो तो पंचक काल समाप्त होने पर गायत्री माता के नाम का हवन कराएं। यदि मकान पर छत डलवाना अनिवार्य हो तो मजदूरों को मिठाई खिलाने के बाद ही छत डलवाना चाहिए।

यदि पंचक काल में शव दाह करना अनिवार्य हो तो शव दाह करते समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें भी अवश्य जलाएं। इसी तरह यदि पंचक काल में पलंग या चारपाई लाना जरूरी हो तो पंचक काल की समाप्ति के बाद ही इस पलंग या चारपाई का प्रयोग करे।

अंत में यह कि यदि पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में फल चढ़ाकर यात्रा प्रारंभ कर सकते है। ऐसा करने से पंचक दोष दूर हो जाता है।

पंचक के प्रकार

1.रविवार को पड़ने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इस पंचक के प्रभाव से शारीरिक और मानसिक समस्याएं होती है इसीलिए कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

2. सोमवार को पड़ने वाले पंचक को राज पंचक कहा जाता है। यह राजकीय या सरकारी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। संपत्ति से जुड़े कार्य भी कर सकते है।

3.मंगलवार को पड़ने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इस पंचक में अग्नि से संबंधित कार्य जैसे मशीनरी, बिजली, भट्टी लगाने जैसे कार्य अशुभ माने जाते है।

4. शुक्रवार को पड़ने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में व्यापार या अन्य किसी भी प्रकार के लेन-देन से बचना चाहिए।

5. शनिवार को पड़ने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है।

6. इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को पड़ने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में पड़ने वालो दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते है। इसमें विवाह, सगाई जैसे कार्य भी किए जा सकते है।

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