प्रत्येक बुरे कर्म का फल हमे भविष्य में मिलता ही है-जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर– दूसरों के प्रति जो कोई बुराई करते हैं वह अपने पास ही रहता है और यदि भलाई करते हैं तो वह बढ़कर हमारे पास वापस आता है । चातुर्मास ऑनलाइन व्याख्यान में टिकरापारा स्थित गुजराती जैन भवन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने उक्त बातें कहीं ।
उन्होंने आगे समझाया कि जब कोई भी व्यक्ति ऐसा सोच कर दूसरों को नुकसान पहुंचाता है तो उसे ऐसा लगता है कि वह उसे नुकसान पहुंचा रहा है लेकिन वास्तव में वह व्यक्ति अपना ही नुकसान करता है और जो व्यक्ति दूसरों का भलाई करता है तो वह भलाई बढ़कर उसके पास वापस आता है । ऐसी भलाई पुण्य के रूप में बढ़कर उसके पास वापस आती है ।


गुरुदेव ने एक घटना सुनाते हुए बताया कि एक महिला प्रतिदिन परिवार के लिए भोजन बनाती थी । उसमें से अलग से एक रोटी बनाकर अपनी रसोई घर के सड़क तरफ पढ़ने वाली खिड़की पर रख देती थी ताकि वह रोटी जिसे आवश्यकता हो वह ले सकता है और हर रोज एक कुबड़ा व्यक्ति रोटी उठाकर यह बोलता था कि बुराई खुद के पास ही रहेगी और भलाई बढ़ कर के वापस आएगी यह कह कर ले जाता था । यह प्रतिदिन का सिलसिला था।
हर रोज की यह बात सुनकर उस महिला को नफरत हो गई और खुन्नस में अगले दिन उसने रोटी में जहर मिला दिया ।रोटी को रखने के बाद उस महिला को यह विचार आया कि यह मैंने क्या किया उसने मेरा क्या बिगाड़ा यह सोचकर उस महिला ने उस रोटी को वापस उठाकर चूल्हे में जला दिया और वापस दूसरी रोटी बनाकर खिड़की पर रख दिया । फिर उसी दिन महिला का एकलौता पुत्र जो काफी समय से कमानी हेतु परदेस गया हुआ था ।

इसका कोई अता-पता नहीं था वह वापस घर आता है । जो कंगाली के हालात में था । उसने अपनी मां को अपने साथ में आपबीती बात की एक घटना के बारे में बताया कि वह 3 दिन से भूखा था और मरणासन्न हो गया था और उसी दिन एक कुबड़े व्यक्ति ने मुझे एक रोटी खिलाई तो मुझ में जान में जान आ गई ।
यह बात सुनकर उसकी मां की आंखों के सामने अंधेरा छा गया और हड़बड़ा गई और सोच में पड़ गई यदि मैंने आज वह जहर वाली रोटी उसको दिया होता तो उसका आज क्या परिणाम होता । इसलिए भलाई करते रहो बुराई की सोचो भी मत । हर बुराई का अंत आज नहीं तो कल पलट कर हमारे ही जीवन में आता है।

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