बिना बताए दूसरों की मदद कर हम आत्मिक आनंद ले सकते हैं – जैन मुनि पंथक

0

बिलासपुर- किसी दूसरे व्यक्ति की भलाई करें तो उसे मालूम ना चले ऐसा कार्य हमें करना चाहिए। कई जगहों पर ऐसा लिखा हुआ रहता है, कि अचानक ही किसी के लिए भलाई का काम करो । दूसरों की मदद कर हम आत्मिक आनंद ले सकते हैं । उक्त बातें टिकरापारा स्थित गुजराती जैन भवन में चातुर्मास ऑनलाइन प्रवचन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनिश्री ने कहीं।
उन्होंने आगे कहा कई भलाई का काम किसी के ख्याल में ही ना हो और ऐसा काम कर दिया हो तो ऐसा करने से आपको जो होगा। ऐसे देने से आनंद की अनुभूति होती है। इसमें दान की भावना नहीं है । फिर भी ऐसा देते हैं तो इसका आनंद अनोखा रहता है ।


एक उदाहरण देते हुए बताया कि हाईवे के टोल नाका में हम अपनी गाड़ी का टोल टैक्स भर देंगे और किसी परिस्थिति के कारण ठीक पीछे वाली गाड़ी का टैक्स भी अभी हम भर देंगे, और उसकी रसीद पीछे वाली गाड़ी को दे देना ऐसा कहकर आगे निकल जाए । जब पीछे वाली गाड़ी अपने टैक्स चुकाने को करता है तभी उसके टैक्स की रसीद देते हुए कहे कि आपका टैक्स आगे वाली गाड़ी वाले ने चुका दिया है। तब पीछे वाली गाड़ी के चालक को इस प्रकार की बात मालूम नहीं होने से ऐसे भलाई के काम से बहुत ही प्रभावित हो जाता है । खुद को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिलती है ।


वैसे ही ऐसी संस्था जिसे सहायक की जरूरत है उनको बिना बताए आर्थिक सहायता करना जिसको जरूरत है, उनके एक सेवक की मदद करना या किसी दवाई दुकान पर पैसा रुपया अपनी ओर से जमा कर देना और दुकानदार को कहने का कि वह जो व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर हो और उसे दवाई की जरूरत है और उसका हिसाब जमा पैसे से कर ले। ऐसे किए गए प्रवृत्तियों से हमें एक अनोखा आत्मिक आनंद प्राप्त होगा । सभी को और हमें भी पॉजिटिव फिलिंग पैदा होगी और सेवा भाव दया भाव हर एक के प्रति प्रेमभाव जागेगा । ऐसा कार्य यदि हरे लोग करने लगेंगे तो यह संपूर्ण विश्व सत्यम शिवम सुंदरम हो जाएगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here