रतनपुर में सबसे वृद्ध माने जाते है वृद्धेश्वर महादेव, जाने महादेव की महिमा

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रतनपुर आदिशक्ति मां महामाया की नगरी है। यहां शक्ति के साथ शिव भी विराजमान है। जहां शक्ति का वास होता है वहां पर स्वयं शिव भी अपनी कृपा बरसाते है। रतनपुर में भी शक्ति के साथ शिव वृद्धेश्वर महादेव के रूप में है। मान्यता है कि यहां पर यह मंदिर सबसे पहले बनवाया गया था। इस वजह से इसे बूढ़ा महादेव भी कहा जाता है। बूढ़ा महादेव का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है। जिसके चलते यहां पर शिव की महिमा व इस चमत्कारिक शिवलिंग को जल अर्पित करने शिव भक्त पहुंचते है।


० मंदिर का निर्माण कराया था वृद्धसेन ने
मंदिर के विषय में कई लोक कथाएं प्रचलित है। मान्यता है कि रतनपुर के राजा वृद्ध सेन ने वर्षों पहले मंदिर का निर्माण कराया था। इसके बाद राजा रत्नदेव प्रथम ने १०५० में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। काफी प्राचीन होने की वजह से इसका एेतिहासिक महत्व भी है।
० प्रचलित है कथा
राजा वृद्धसेन के पास बहुत सारी गाये थी उन्हें चरवाहा जंगल चराने के लिए ले जाया करते थे। जंगल में गायों का एक झुंड अलग होकर बांस की घनी झाडि़यों में जाकर शिवजी का दूध से अभिषेक करती थी। चरवाहे ने यह जानकारी राजा को दी। राजा ने भी इसकी पुष्टि कर आश्चर्यचकित रह गए। उसी रात भगवान ने राजा को स्वप्न देकर इस बात का प्रमाण दिया। इसके साथ ही मंदिर के निर्माण का भी आदेश दिया। राजा ने भगवान के आदेश से ही इस मंदिर का निर्माण कराया था।


० कुंड का जल कभी नहीं होता कम
इस मंदिर के पास एक जल कुंड है। उस कुंड के जल से ही महादेव का अभिषेक किया जाता है। साल भर में इस कुंड का जल बिल्कुल भी कम नहीं होता है। चाहे जितना भी पानी इस कुंड से निकाला जाए। वह कभी कम होता ही नहीं है। इसके पीछे भी भगवान शिव की महिमा को ही कारण माना जाता है।
० मनोरथ होता है पूर्ण
महादेव भोले भंडारी है और उनके दरबार में जो भी आता है उसकी मुराद पूरी होती ही है। इस मंदिर में खास तौर पर कुंवारी कन्याएं पूजन के लिए आती है। उनको मनचाहा वर प्राप्त होता है। वहीं जो भी यहां दर्शन कर मुराद मांगता है महादेव उसे अवश्य ही पूर्ण करते है।

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  1. हमारे आसपास के प्राचीन मंदिरो के पुरातात्विक महत्व से अवगत कराने के लिए पत्रिका एवं काजल को बहुत बहुत धन्यवाद 💐💐

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