विश्वकर्मा की मनाई गई जयंती, पूजा-अर्चना कर मांगा गया व्यापार में वृद्धि का वरदान

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बिलासपुर.देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती शुक्रवार को भक्तिमय वातावरण में की गई। विधि-विधान से देवशिल्पी की पूजा-अर्चना की गई। फैक्ट्री, उद्योगों के साथ ही शहर के शासकीय व निजी कार्यालयों में भी देव शिल्पी विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित कर पूजा की गई। मंत्रोंचारण के साथ देव शिल्पी के जयकारे गूंजते रहे। वहीं दिन भर भजन-कीर्तन करते हुए उद्योगों, गैराजों में कार्य करने वाले कर्मचारियों ने पूजन में सहयोग किया। विश्वकर्मा देव से कारोबार में उन्नति व तकनीकी कार्यों में सफलता का वरदान मांगा।


ऐसी मान्यता है कि देवशिल्पी ने ही देवताओं के महलों व अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। हिन्दू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण व सृजन का देवता माना जाता है। रेलवे, एसईसीएल, नगर निगम, विद्युत विभाग, पीडब्ल्यूडी जैसे सरकारी कार्यालयों के अलावा शहर के गैराज व उद्योगों में पूजन कार्यक्रम दिनभर चलता रहा। कुछ जगहों पर एक दिन में ही पूजन विधि पूरी की गई। वहीं कुछ स्थानों में तीन दिन तक पूजा-अर्चना की जाएगी। जिसमें पहले दिन स्थापना, दूसरे दिन भंडारा व तीसरे दिन विसर्जन की विधि की जाएगी।


भगवान विश्वकर्मा की पौराणिक कथा
पुराणों में जिक्र है कि इस पूरे ब्रम्हांड की रचना विश्वकर्मा के द्वारा ही की गई र्थी विश्वकर्मा जी के द्वारा धरती, आकाश और जल की रचना की गई है। विश्वकर्मा पुराण में बताया गया है कि नारायण जी ने पहले ब्रम्हाजी फिर विश्वकर्मा जी की रचना की थी। विश्वकर्मा द्वारा अस्त्र-शस्त्र का निर्माण किया गया। भगवान विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था। कहते है कि भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल की पूजा के लिए रावण को बुलाया लेकिन रावण महल को देखकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने दक्षिणा के रूप में महल को ही मांग लिया था। भगवान शिव रावण को महल सौंप कर खुद कैलाश पर्वत चले गए। इसके अलावा पांडवों के लिए इंद्र प्रस्थ नगर का निर्माण, कौरवों के लिए हस्तिनापुर और भगवान श्री कृष्ण के लिए द्वारका का निर्माण किया था।

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