अच्छे कर्मों से पुण्य और बुरे कर्मों से पाप जमा होता है- जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर- भगवान का यह कैसा न्याय है कि दुष्ट पापी और दुराचारी ऐस और आराम से जीते हैं और धर्मी और सदाचारी आत्मा दुख भरे दिन बिताते हैं ।जब पापी दुराचारी जीव की जो निर्दोष लोगों पर जुल्म करता है गुंडागिरी से पैसा वसूलता है बलात्कार जैसे अपराध करते हैं वैसे लोग सुखी से और वैभव और ऐश्वर्य भरी जिंदगी जीते हैं । शनिवार को गुजराती जैन भवन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कही ।


उन्होंने आगे कहा और दूसरी ओर न्याय नीति, ईमानदारी धार्मिक और परिश्रम युक्त जिंदगी जिता है। वह दुख भरी परिस्थिति में अपना दिन गुजारते हैं । जब ऐसा होता है तो हमें भगवान और धर्म के ऊपर से भरोसा उठ जाता है । गुस्सा भी अधिक आता है कि तेरा कैसा हिसाब है । इस पेचिदे सवाल को समझने के लिए धर्म का सिद्धांत समझने का जरूरी है । खास बात तो यह है कि भगवान डायरेक्टली किसी को दुख भी नहीं देता है और सुख भी नहीं देता है । यह सब हमारे कर्मों के अधीन होता है । अच्छे कर्मों से हमारे पास पुण्य जमा होता है और बुरे कर्मों से पाप जमा होता है ।


ऐसे पाप पुण्य की प्रविष्टि ऑटोमेटेकली कर्मराजा के स्वयं संचालित कंप्यूटर में एंट्री हो जाती है । इनमें से जिस कर्मों का भुगतान हो जाता है वह खत्म हो जाती है और नई कर्म की एंट्री होती रहती है । ऐसे कर्मों का निकाल कभी-कभी उसी समय हो जाता है । कई कर्म का फैसला लंबी अवधि तक ऐसे ही पड़ी रहती है । ऐसा समय को अबाधा काल कहा जाता है । ऐसा होने का कारण यह है कि जिसने साय कर्म बंधन हुआ है उसका संयोग होना जरूरी है । और यह कभी.कभी हजारों साल बाद भी हो सकता है । इस अवस्था में पाप पुण्य दोनों प्रकार की एंट्री हो सकती है ।

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