हाथ पर लाल धागा बांधने से सेहत की सुरक्षा, जाने धार्मिक कारण

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पूजा-पाठ हो या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान मौली धागा, कलावा अथवा लाल रंग का रक्षा सूत्र भगवान को अर्पित कर बाद में लोगों की कलाई पर पंडित जी बांधते है। इस लाल धागे को पूजन कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बांधा जाता है।

इस लाल धागे के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। जब कलाई पर लाल धागा बांधते है तब मंत्र का जाप पुजारी करते है। कलाई पर लाल धागा बांधना सेहत के दृष्टि से बहुत अच्छा माना गया है।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक लाल रंग हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक यह स्वास्थ्य व सेहत की रक्षा करता है।

मौली धागा क्या है जाने

मौली का शाब्दिक अर्थ है सबसे ऊपर। इसका अर्थ सिर से भी है। शंकर भगवान के सिर पर चंद्रमा विराजमान है। इसीलिए शिवजी को चंद्रमौलेश्वर भी कहा जाता है। मौली बांधन की प्रथा तब से चली आ रही है जब दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था।

कलाई पर ही बांधते है मौली

कलाई पर मौली वहां बांधी जाती है जहां से आयुर्वेद के जानकार वैद्य नाड़ी की गति पढ़कर बीमारी का पता लगाते है। इस जगह मौली बांधने से पल्स पर दबाव बना रहता है और हम त्रिदोषों से बच सकते है। इस धागे से दबाव से त्रिदोष यानी कफ, वात और पित्त से संबंधित तीन तरह की बीमारियां कंट्रोल हो सकती है।

कफ यानी सर्दी-जुकाम और बुखार से जुड़ी बीमारियां, वात यानी गैस, एसीडिटी से जुड़ी बीमारियां, पित्त यानी फोड़े-फंुसी, त्वचा से जुड़ी बीमारियां ।इन सभी बीमारियों की परख वैद्य कलाई की नब्ज से करते है।

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