सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनाती है तुलसी -ब्रह्माकुमारी मंजू

0

बिलासपुर. जिस आंगन में बहुत सारे तुलसी के पौधे लगे होते हैं वहां कोई भी व्यक्ति प्रवेश करे तो उसे एक सकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही अनुभव होती है किसी को कहने की आवश्यकता नहीं होती कि आप यहां सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करो,

ये स्वतः ही अनुभव होती है। अधिक ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पौधों में तुलसी के पौधे का विशेष स्थान है। जिनके यहां तुलसी का पौधा नहीं वे बाजार से तुलसी का सत्व लेकर प्रयोग करते हैं क्योंकि ये विशेष आयुर्वेदिक महत्व रखता है।

इसका विशेष कार्य शुद्धिकरण है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उक्त बातें तुलसी-विवाह, देवउठनी एकादशी के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में इस त्योहार का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।

उन्होंने ने बताया कि रोज प्रातः 3.4 पत्ते तुलसी के सेवन करने से शरीर निरोग रहता है। ये हमारी प्राचीन संस्कृति का पौधा है। हमारी संस्कृति के त्यौहार मौसम के अनुकूल खानपान की स्मृति दिलाते हैं

दीदी ने बताया कि मौसम परिवर्तन के साथ यह त्योहार हमें खानपान में परिवर्तन की स्मृति दिलाते हैं। इस दिन पूजा में प्रयोग किये जाने वाले आंवला, बेर, सिंघाड़ा, चना-बूट, गन्ना, शकरकन्द आदि सभी विभिन्न विटामिन्स, प्रोटीन्स, मिनरल्स, फाइबर्स व अन्य पोषक तत्वों के स्रोत हैं।

पोस्ट कोविड लक्षण वाले मरीजों को जल्द जिला अस्पताल में भी मिलेगा इलाज

तुलसी पवित्रता की व शालिग्राम पारसबुद्धि का प्रतीक-ब्रम्हकुमारी ईष्वरी

इस पर्व पर आने वाले वाली वृन्दा और जलन्धर की कथा सुनाते हुए सेवाकेन्द्र की बहन ब्रम्हकुमारी ईश्वरी ने बताया कि तुलसी पवित्रता का प्रतीक है क्योंकि वृन्दा एक पतिव्रता स्त्री थी और उनके पवित्रता की उत्पत्ति के रूप में तुलसी के पौधे को बताया गया है।

तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ हुआ अर्थात् जब हम पवित्रता को धारण करते हैं व भगवान को याद करते हैं तो हमारी बुद्धि पत्थर से पारस बन जाती है। यह कथा हमें यह भी शिक्षा देती है कि जिस प्रकार के कर्म का बीज हम बोयेंगे वैसा ही फल हमें मिलेगा।

होम आइसोलेट हुए लोग जिम्मेदारी से पूर्ण करें निर्धारित आइसोलेशन अवधि, न बरतेंलापरवाही-सीएमएचओ

ईर्ष्या करना व किसी के बारे में बुरा सोंचना जैसे दुर्गुणों से ऊपर उठकर सत्कर्म करने की प्रेरणा यह कथा हमें देती है। इस अवसर पर सेवाकेन्द्र में गन्ने के मण्डप में तुलसी का पौधा सजाया गया व तुलसी-विवाह की पूजा में सेवाकेन्द्र से जुड़ी हुई माताएं शामिल हुईं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here