श्रीकृष्ण के भाई बलराम का आज है जन्मदिवस, जाने उनकी आश्चर्यजनक शक्तियों के विषय में

3

हलषष्ठी या हरछठ का दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्मदिन माना जाता है। इस दिन माताएं अपने संतान के लंबी आयु व उज्ज्वल भविष्य की कामना से व्रत कर पूजन करती है। इस लेख में हम बलराम के विषय में बताएंगे। उनकी आश्चर्यजनक शक्तियों की भी जानकारी देंगे।
बलराम को बलदाउ भी कहते है बलराम बहुत ही शक्तिशाली थे। बलराम देवकी व वसुदेव के सातवें पुत्र माने जाते है। उनके जन्म के पूर्व मां देवकी ने लोमस ऋषि के कहने पर हलषष्ठी का व्रत किया था और हलषष्ठी के दिन ही बलराम का जन्म हुआ था। इसके साथ ही इस व्रत के कारण ही श्रीकृष्ण भी देवकी व वसुदेव के आठवें संतान के तौर पर सुरक्षित रहे। इसलिए इस व्रत की महिमा बहुत ज्यादा मानी जाती है। हर माता अपने संतान के दीर्घायु व उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए व्रत करती है।

बलराम का परिचय जाने

कृष्ण को विष्णु तो बलराम को शेषनाग का अवतार माना जाता है। कहते है कि जब कंस ने देवकी-वसुदेव के छहः पुत्रों को मार डाला, तब देवकी के गर्भ में भगवान बलराम पधारे। योगमाया ने उनहें आकर्षित करके नंद बाबा के यहां निवास कर रही श्री रोहिणीजी के गर्भ में पहुंचा दिया। इसलिए उनका एक नाम संकर्षण पड़ा। बलराम का विवाह रेवती से हुआ था। बलवानों में श्रेष्ठ होने के कारण उन्हें बलभद्र भी कहा जाता है। इनके नाम से मथुरा में दाउजी का प्रसिद्ध मंदिर है। जगन्नाथ की रथयात्रा में इनका भी एक रथ होता है। यह गदा धारण करते है। मौसुल युद्ध में यदुवंश के संहार के बाद बलराम ने समुद्र तट पर आसन लगाकर देह त्याग दी थी। जरासंध को बलराम जी अपने योग्य प्रतिद्वंद्वी जान पड़े। यदि श्रीकृष्ण ने मना न किया होता तो बलराम जी प्रथम आक्रमण में ही उसे यमलोक भेज देते।

शक्तिशाली होकर भी नहीं लड़े महाभारत का युद्ध

भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने श्रीकृष्ण को कई बार समझाया कि हमें युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए। क्योंकि दुर्योधन और अर्जुन दोनों ही हमारे मित्र है। ऐसे धर्मसंकट के समय दोनों का ही पक्ष न लेना उचित होगा। लेकिन कृष्ण को किसी भी प्रकार की कोई दुविधा नहीं थी। उन्होंने इस समस्या का भी हल निकाल लिया था। उन्होंने दुर्योधन से ही कह दिया था कि तुम मुझे और मेरी सेना दोनों में से किसी एक का चयन कर लो। दुर्योधन ने कृष्ण की सेना का चयन किया। महाभारत में वर्णित है कि जिस समय युद्ध की तैयारियां हो रही थी और उधर एक दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम पांडवों की छावनी में अचानक पहुंचे। दाउ भैया को आता देख श्रीकृष्ण युधिष्ठिर आदि बड़े प्रसन्न हुए।

सभी ने उनका आदर किया। सभी को अभिवादन कर बलराम धर्मराज के पास बैठ गए। फिर उन्होंने बड़े व्यथित मन से कहा कि कितनी बार मैनें कृष्ण को कहा कि हमारे लिए तो पांडव और कौरव दोनों ही एक समान है। दोनों को मूर्खता करने की सूझी है इसमें हमें बीच में पड़ने की आवश्यकता नहीं, पर कृष्ण ने मेरी एक न मानी। कृष्ण को अर्जुन के प्रति स्नेह इतना ज्यादा है कि वे कौरवों के विपक्ष में कैसे जाउं। भीम और दुर्योधन दोनों ने ही मुझसे गदा सीखी है। दोनों ही मेरे शिष्य है। दोनों पर मेरा एक जैसा स्नहे है। इन दोनों कुरूवंशियों को आपस में लड़ते देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता अतः मैं तीर्थयात्रा पर जा रहा हूं।

दो दिन बड़े है बलराम श्रीकृष्ण से

श्रीकृष्ण व बलराम के विषय में सभी को पता है कि वे दोनों भाई है। बलराम बड़े और श्रीकृष्ण छोटे है। बलराम का जन्म भाद्रपद की शश्ठी की तिथि को हुआ था। इसके दो दिन बाद ही श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की तिथि को हुआ था। दोनों ही एक-दूसरे से बहुत ज्यादा स्नेह करते थे। श्रीकृष्ण अपने भैया बलराम को बहुत आदर व मान सम्मान देते थे।

श्रीकृष्ण व बलराम नहीं रहते एक-दूसरे के बिना

द्वापर युग में जब श्रीहरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया तब शेषनाग ने भी बलराम के रूप में जन्म लिया। शेषनाग श्री हरि विष्णु के बिना कभी भी नहीं रहे है। इसलिए वह प्रभु के हर अवतार में उनके साथ स्वयं भी आते है। त्रेतायुग में श्रीराम के साथ लखन के रूप में साथ रहे।

3 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here