दूसरों की निंदा चुगली करने से, निंदा का पात्र होने से बचें- जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर– दूसरों की निंदा, चुगली करने की मन में जो छटपटाहट होती है उसे रौंदने की आपत बनाओ । जब हम किसी के लिए खराब अभिप्राय व्यक्त करते हैं या तो दूसरों की निंदा चुगली करते हैं । तब यह याद रखना चाहिए उससे दूसरों का कुछ नुकसान नहीं होता है, पर हम खुद उनकी नजरों में उपहास के पात्र बनते हैं, और हमारी छवि खराब होती है । उक्त बातें टिकरापारा स्थित जैन भवन में चल रहे ऑनलाइन चातुर्मास प्रवचन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कही।


उन्होंने कहा जब मीटिंग, क्लब, किटी पार्टी व समारोह में हम जाकर या पाएंगे कि आम तौर पर वहां निंदाए चुगली और हल्ला-गुल्ला आदि होता है । इस पर यदि हम विचार करें तो भी हम पाएंगे कि यह जो वहां हो रहा है उसी से यहां उपस्थित लोगों और दूसरों का कुछ तो भला होना ही नहीं है । अपितु अच्छे उद्देश्य की जगह पर दूषित वातावरण का माहौल बन जाता है । वास्तव में किसी को खुद निंदा का पात्र बनना पसंद नहीं होता है अगर आप दूसरों की निंदा करोगे तो उसी चरण आप अपना आत्म निरीक्षण करोगे तो पाएंगे कि आपका आत्मविश्वास खत्म हो गया है । आपको स्वयं शर्मिंदा हो जाओगे ।


जब आप दूसरों की निंदा चुगली करते हैं तो आप समझ लेना कि आप खुद आपने लिए जगत को यह संदेश भेज रहे हो कि मुझे खुद को भी निंदा पात्र होने की आवश्यकता है । अगर ऐसा कुछ होता है तो वह अपने लिए गर्व की बात नहीं है । यदि आप दूसरों की निंदा व चुगली नहीं करोगे तो खुद में सहनशीलता का गुण प्रकट होगा और सबकी नजरों में सम्मान के पात्र बनोगे ।

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