इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जाने विस्तार से तिथि व पर्व का महत्व

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भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षा बंधन इस वर्ष 22 अगस्त को मनाया जाएगा। यह पर्व इस बार भद्रा से मुक्त होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक बिना कोई बाधा के इस पर्व को मनाया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक  सावन पूर्णिमा को श्रावणी उपाकर्म और द्विजातियों द्वारा विशेष अनुष्ठान, पूजन भी किया जाएगा। इस दिन चन्द्रमा का संचरण मकर राशि से कुंभ राशि में सुबह 8:35 बजे होगा। इसी के साथ पंचक प्रारंभ हो जाएगा। उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार पूर्णिमा तिथि शनिवार, 21 अगस्त को शाम 6:10 बजे से शुरू हो जाएगी, जो 22 अगस्त को शाम 5:01 बजे तक रहेगी। 

श्रावणी उपाकर्म और जनेऊ पूजन होगा:

ज्योतिषाचार्य अवध नारायण द्विवेदी के अनुसार सावन पूर्णिमा के दिन श्रावणी उपाकर्म, जनेऊ पूजन सुबह 8:30 बजे तक विशेष शुभ रहेगा। श्रावणी उपकर्म द्विजातियों का विशेष पर्व होता है। इस दिन गंगा स्नान कर पंचगव्य पानकर विधिवत संकल्प लिया जाता है। 

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त


सुबह 7 बजे से सुबह 8:35 बजे तक। 
लाभ चौघड़िया सुबह 7 बजे से सुबह 10:20 बजे तक।
शुभ चौघड़िया : दोपहर 1:40 से 3:10 बजे तक।

शोभन योग का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शोभन योग को शुभ कार्यों और यात्रा पर जाने के लिए उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस योग में शुरू की गई यात्रा मंगलमय एवं सुखद रहती है।

धनिष्ठा नक्षत्र का महत्व-

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल हैं। कहा जाता है कि इस नक्षत्र में जन्मा जातक भाई-बहन के प्रति विशेष लगाव रखता है। खास बात यह है कि रक्षा बंधन का त्योहार भी भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे लोग बहुमुखी प्रतिभा और बुद्धि के धनी होते हैं।

राखी बांधने का सही तरीका-

ज्योतिषियों के अनुसार, राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। बहनों को पूजा की थाली में चावल, रौली, राखी, दीपक आदि रखना चाहिए। इसके बाद बहन को भाई के अनामिका अंगुली से तिलक करना चाहिए। तिलक के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाएं। अक्षत अखंड शुभता को दर्शाते हैं। उसके बाद भाई की आरती उतारनी चाहिए और उसके जीवन की मंगल कामना करनी चाहिए। कुछ जगहों पर भाई की सिक्के से नजर उतारने की भी परंपरा है।

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