इस बार रक्षा बंधन में बन रहा खास योग, राखी बांधने के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त, जाने यहां

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श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन इस वर्ष 3 अगस्त को रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस बार रक्षा बंधन में खास योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक ऐसा संयोग बहुत कम आता है जब सावन माह के अंतिम दिन ही पूर्णिमा हो और वो भी दिन सोमवार का हो। ऐसे योग सर्वश्रेष्ठ माने गए है। इस बार ऐसा संयोग खास होगा। साथ ही शुभ मुहूर्त भी होंगे।
ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त का खास महत्व होता है। इसलिए किसी भी त्योहार में मुहूर्त को महत्व दिया जाता है। वैसे देखा जाए तो भाई-बहन के स्नेह का पर्व किसी मुहूर्त व दिन का मोहताज नहीं होता है। लेकिन फिर भी जो मुहूर्त को मानते है उनके लिए इस बार पांच घंटे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होंगे। इस लेख के माध्यम से हम खास योग व मुहूर्त के विषय में बताएंगे।

इस मुहूर्त में बांधे राखी

राखी अपराध काल व्यापिनी और प्रदोष युक्त मुहूर्त में बांधना सर्वश्रेष्ठ होता है। सुबह उपाक्रम व ऋषि तर्पण किया जाता है। इसके बाद श्रवण पूजन होती है और भद्रा निकलने के बाद राखी बांधना शुरू किया जाता है। इस बार तीन अगस्त की सुबह 9 बजकर 29 बजे के बाद से भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद राखी बांधी जा सकेगी।

चोघडियां के अनुसार राखी के मुहूर्त

-शुभ चोघड़ियाः सुबह 9 बजकर 29 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक।
-अभिजीत मुहूर्तः दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 59 बजे तक।
-चर का चोघड़ियाः दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से 3 बजकर 51 मिनट तक।
-लाभ का चोघड़ियाः दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक।
-अमृत का चोघड़ियाः शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट तक।

मौली धागा को माना गया है सर्व श्रेष्ठ राखी

वैसे तो बाजार में बहुत तरह की राखियां आती है। लेकिन यह सब आधुनिक दौर के कारण है। लेकिन सर्वश्रेष्ठ राखी के तौर पर रक्षा सूत्र या मौली धागा को माना गया है। पुराणों में भी उल्लेखित है जब भी बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती थी वह रक्षा सूत्र या मौली धागा ही हुआ करता था। ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक बहनों को अपने भाई के कलाई पर फैंसी राखी के अलावा मौली धागा अवश्य ही बांधना चाहिए।

29 साल बाद बन रहा संयोग

इस साल सावन के आखिरी सोमवार यानी 3 अगस्त पर रक्षाबंधन का त्योहार पड़ रहा है। भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन इस बार बेहद खास होगा। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि इस दिन सर्वाथ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग बन रहा है। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है। साथ ही साथ सूर्य समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इसके पहले यह संयोग साल 1991 में बना था। इस संयोग से कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके साथ ही शाम 7बजकर 49 मिनट से दीर्घायु कारक आयुष्मान योग भी लग जाएगा।

अटूट बंधन का इतिहास

अटूट बंधन का इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिशुपाल राजा का वध करते समय भगवान श्री कृष्ण के बाएं हाथ से खून बहने लगा तो द्रौपदी ने तत्काल अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ की अंगुली पर बांध दिया। कहा जाता है कि तभी से भगवान श्रीकृष्ण द्रौपदी को अपनी बहन मानने लगे और सालों बाद जब पांडवों ने द्रौपदी को जुए में हार गए और भरी सभा में जब दुशासन द्रौपदी का चीरहरण करने लगा तो भगवान कृष्ण ने भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी लाज बचाई थी। मान्यता है तब से ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा है जो आज भी जारी है। श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षा बंधन मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता यह भी है कि रावण की बहन ने सुर्पणखा ने भद्रा काल में ही उसे रक्षा सूत्र बांधा था जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था।

भद्रा काल के विषय में जाने

पौराणिक मान्यता के अनुसार देखे तो भद्रा का संबंध सूर्य और शनि से है। मान्यता है कि जब भद्रा का वास किसी पर्व काल में स्पर्श करता है तो उसके समय की पूर्ण अवस्था तक श्रद्धावास माना जाता है। भद्रा का समय 7 से 13 घंटे 20 मिनट तक माना जाता है लेकिन बीच में नक्षत्र व तिथि के अनुकम तथा पंचक के पूर्वार्द्ध नक्षत्र के मान व गणना से इसके समय में घट बढ़ होती रहती है। इस तिथि को अशुभ तिथि माना जाता है।

4 COMMENTS

  1. रक्षा बंधन की बहुत बहुत बधाई हो ।
    ईस माध्यम से जरुरी जानकारी मीली है

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