गणगौर पूजा के दौरान गाए जाते है ये गीत, जाने यहां

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गणगौर पूजा मारवाड़ी समाज के द्वारा किया जाता है। महिलाएं व कुंवारी कन्याएं ईसर गौरा की पूजा करती है। जल देने से लेकर भोग लगाने तक हर दिन महिलाएं गीत गाती है। इस लेख के माध्यम से हम गणगौर पूजा विधि के दौरान गाए जाने वाले प्रत्येक गीत को बता रहे है।

गणगौर पूजन में जंवारा लगाते समय गाते है यह गीत

आयो-आयो चैतडल्या रो मास जी,

जंवरा जतन कर राखज्यो जी।

ईसरदासजी पेचडल्या में टांक सी जी,

जंवारा जतन कर राखज्यो जी।

बहू ओ गोरांदे रे चुडले रे माय जी,

जंवारा जतन कर राखज्यो जी।

गणगौर गीत-2

म्हारा हरिया ए जुंवारा राज कि लांबा-तीखा सरस बढ्या,

म्हारा हरिया ए जुंवारा राज कि गंऊ लाल सरस बढ्या,

गोर-ईसरदासजी का बाया ए क बहु गोरल सींच लिया,

भाभी सींच न जाणों ए क जो पीला पड़ गया,

बाइजी दो घड सींच्या ए क लांबा-तीखा सरस बढ्या,

म्हारो सरस पटोलो ए क बाई रोवां पैर लियो,

गज मोतीडा रो हारो ए क बाई रोवां पैर लियो,

म्हारो दांता बण्या चुडलो ए क बाई रोवां पैर लियो,

म्हारा डब्बा भरियो गैणों ए क बाई रोवां पैर लियो,

म्हारी बारंग चूंनड ए क बाई रोवां ओढ़ लेई,

म्हारो दूध भरयो कटोरो ए क बाई रोवां पी लियो,

बीरा थे अजरावण हो क होज्यो बूढ़ा डोकरा,

भाभी सैजां में पोढ़ो ए क पीली पाट्यां राज करे।

गणगौर के लिए दूब लाते समय गाते है ये गीत

गोर ए गणगौर माता खोल किंवाडी,

बाहर ऊबी थारी पूजन वाली,

पूजो ए पुजावो संइयो कांई-कांई मांगा

मांगा ए म्हें अन-धन लाछर लिछमी जलहर जामी बाबुल मांगा,

रातां देई मांयड, कान्ह कंवर सो बीरो मांगा, राई(रक्मणी) सी भौजाई,

ऊंट चढ्यो बहनोई मांगा, चूनडवाली बहना,

पून पिछोकड फूफो मांगा, मांडा पोवण भूवा,

लाल दुमाल चाचो मांगा, चुडला वाली चाची, बिणबाजों सो मामो मांगा,

बिणजारी सी मामी, इतरो तो देई माता गोरजा ए,

इतरो सो परिवार,

दे ई तो पीयर सासरौ ए,

सात भायां सी जोड,

परण्यां तो देई माता पातला(पति) ए सारां में सिरदार

गणगौर पूजा हो गई शुरु जाने व्रत का महत्व

गणगौर गीत-2

ऊंचों चंवरो चकुटो, जल जमना रो नीर मंगावो जी,

जठे ईसरदासी सापड्या (विराजे है), बहू गोरां ने गोर पुजावो जी,

जठे कानीराम जी सापड्या बहु लाडल ने गोर पुजावो जी,

जठे सूरजमलजी सापड्या, बाई रोवां ने गोर पुजावो जी,

गोर पूजता यूं कैवे सायब या जोडी इभ् छल (इसी तरह) राखो जी,

या जोडी इभ् छल राखो जी म्हारा चुडला रो सरव सोहागो जी,

या जोडी इभ छल राखो जी म्हारै चुडला रे राखी बांधो जी।

गणगौर पूजन में दूब के साथ 8 बार पूजा करते है

गोर-गोर गोमती, ईसर पूजूं पार्वतीजी,

पार्वती का आला-गीला, गोर का सोना का टीका,

टीका दे, टमका दे राणी, बरत करे गोरांदे रानी,

करता-करता आस आयो, मास आयो,

खेरे खांडे लाडू आयो, लाडू ले बीरा ने दियो,

बीरो ले गटकाय ग्यो, चूंदडी ओढाय ग्यो,

चूंदड म्हारी इब छल, बीरो म्हारो अम्मर, राण्यां पूजे राज में, म्हे म्हांका सवाग में,

राण्यां ने राज-पाट द्यो, म्हांने अमर सवाग द्यो,

राण्यां को राज-पाट तपतो जाय,

म्हारो सरब सवाग बढ़तो जाए,

ओल-जोल गेहूं साठ, गौर बसे फूलां कै बास,

म्हें बसां बाण्यां के बास कीडी-कीडी कोडूल्यो, कीडी थारी जात है,

जात है गुजरात हैसाडी में सिंघाडा,

बाडी में बिजौराईसर-गोरजा,

दोन्यूं जोड़ा, जोड्या जिमाया, जोड जंवारा,

गेहूं क्यारागणमण सोला, गणमण बीस, आ ए गौर करां पच्चीस

गणगौर को बिंदियां लगाते समय ये गाते है

आ टीकी बहू गोरां ने सोवै,

तो ईसरदासजी बैठ घडावै ओ टीकी,

रमाक झमां, टीकी, पानां क फूलां टीकी, हरयो नगीनो,

एआ टीकी बाई रोयणदे ने सोवै,

तो सूरजमलजी बैठ घडावै ओ टीकी,

रमाक झमां टीकी, पानां क फूलां टीकी, हरयो नगीनो,

ए आ टीकी बहू ने सोवै, तो बेटा बैठ घडावै ओ टीकी,

रमाक झमां, टीकी, पानां क फूलां टीकी, हरयो नगीनो ऐ।

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