पहले खुद जीती टीबी से जंग अब दूसरों को कर रही है जागरूक

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बिलासपुर.वर्तमान समय में सरकार द्वारा काफी प्रयास करने के बाद भी टीबी यानि क्षय रोग से पीड़ित नए नए मरीज़ मिल रहे हैं इसका कारण यह है कि लोगों द्वारा इस रोग को छिपाया जाता है और सही समय पर इसकी जांच नहीं करायी जाती है । इस रोग के सम्बन्ध में एकटीबी चैंपियंस ने अनूठी मिसाल पेश की है ।

आज वह न सिर्फ खुद टीबी की बीमारी से पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं बल्कि लोगों को भी इससे बचने और समय से इस बीमारी का इलाज कराने के लिएजागरूक करने का काम भी कर रही हैं। बिलासपुर के चांटीडीह अंतर्गत संजय नगर निवासी 20 वर्षीय मनीषा श्रीवास की टीबी से जंग की कहानी दूसरों को प्रेरणा देने वाली है। मनीषा ने बताया ष्ष्साल 2019 से उन्हें टीबी के लक्षण दिखना शुरू हो गए थे

लेकिन झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के चलते उसनेइस बीमारी को हल्के में लिया। मनीषा का कहना है कि ष्ष्जब भी उसे सर्दी, खांसी और बुखार आता वह मोहल्ले के एक छोलाछाप डॉक्टर के पास चली जाती थी। वह उसे दवा दे देता और उसे कुछ दिन के लिए राहत मिल जाती। यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा।

इस दौरान मनीषा एक कपड़े की दुकान में नौकरी भी करती रही। वहां बार.बार तबीयत खराब होने पर दुकान मालिक भी नाराज होता था। कोरोना काल में दुकान के दूसरे लोग कोरोना हो गया है कहकर मनीषा को चिढ़ाते थे। एक दिन मनीषा के सीने में तेज दर्ज हुआ और चक्कर भी आया। किसी तरह वह अपने घर पहुंची।इसके बाद मनीषा ने एक निजी चिकित्सालय के डॉक्टर से अपना चेकअप कराया।

उसने उसे कुछ दवाएं दीं।दवा के बाद भी जब मनीषा को राहत नहीं मिली तो डॉक्टन ने उसे टीबी की जांच कराने की सलाह दी। मनीषा ने सिम्स चिकित्सालय जाकर अपनी जांच कराई तो वह टीबी पॉजिटिव आ गई। टीबी होने की बात सुनकर वह काफी डर गई और घर जाकर खूब रोई। इसके बाद उसकी मां और पिता ने उसका बहुत सहयोग किया

और उसे इस बीमारी से लड़ने के लिए प्रेरित भी किया इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसका पंजीयन करटीबी का इलाज़ किया गया। इसके बाद मितानिन द्वारा समय.समय पर उसको दवाई खिलाई गयी सही समय पर दवा और सावधानी बरतने से मनीषा आज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुकी है।

सिलाई के साथ लोगों को करती है प्रेरित

टीबी केइलाज के दौरान मनीषा डिट्रिक्ट पब्लिक प्राईवेट मिक्स क्वार्डिनेटर आशीष सिंह, सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर बिलासपुर शहर माखन भारती, एसटीएस गीता सक्सेना, एसटीएस जीवन महंत से भी मिली और उनके काम को देखकर काफी प्रेरित हुईं।

मनीषा का कहना है कि जिस तरह मैंनेसमय पर उपचार कराकर और दवाइयों का सेवन करकेटीबी से जंग जीती है वैसे ही दूसरे लोग भी करें। इसके लिए उसने भी लोगों को प्रेरितकरने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद माखन भारती ने टीबी की नोडल डॉ. गायत्री बांधी से बात की और मनीषा को काम करने का मौका दिया।

मनीषा आज सिलाई के साथ टीबी के मरीजों को जागरूक करने का काम भी करती हैं। इससे उनकी न सिर्फ आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि अपने मन का कार्य करके उसको काफी सुकून भी मिल रहा है।

टीबी के लक्षण और बचाव

जिले में टीबी की नोडल डॉ. गायत्री बांधी ने बताया ष्ष्दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी, बुखार, भूख न लगना, वजन का गिरना और छाती में दर्द की शिकायत हो तो सरकारी अस्पताल में जाकर जांच कराएं।

नियमित दवा का सेवन और खानपान का ख्याल रखने से जल्द ही इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। दवा के दौरान धूम्रपान, शराब और नशीली दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें। तनाव पर नियंत्रण रखे और संतुलित आहार लें, इससे टीबी की जंग निश्चित रूप से जीती जा सकती है।

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