तीन दिवसीय अखंड पाठ साहब का हुआ समापन

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धन गुरु नानक दरबार डेरा संत बाबा थाहीयरियां सिंह साहब जी दरबार संत कंवर राम नगर कॉलोनी स्थित में तीन दिवसीय अखंड पाठ साहब संपन्न हुआ। प्रथम अखंड पाठ साहब रखा गया प्रतिदिन रात 8:30 बजे से 10:00 बजे महान कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया।
इस कीर्तन दरबार में नवसारी गुजरात से भाई सनी मूलचंदानी
जी बिलासपुर पहुंचे साथ संगत को प्रतिदिन गुरबाणी व कीर्तन से निहाल किया बीच-बीच में गुरु की अमृतवाणी के कहे हुए वचन वह उनकी कथाएं भी सुनाते रहे।
कि किस तरह गुरु अपने भक्तों के रक्षा के लिए कैसे-कैसे लीलाएं करते हैं कैसे-कैसे दुख तकलीफ सह कर भी भक्तों की रक्षा करते हैं बस जरूरत है भक्तों को सच्चे मन से गुरु की आराधना करें गुरु दरबार में हाजिरी लगाएं सेवा करें वह घर बैठे अपने गुरु का नाम का जाप करें गुरु हमेशा भक्तों के संग रहते हैं वह कहते हैं कि बस भक्त मुझे जब याद करे तो वह सामने प्रकट हो जाते हैं किस न किसी रूप में शब्द कीर्तन में गुरु की महिमा बताएं की श्री हरिकिशन का नाम जपिए जिससे आपके सब दुख दर्द दूर हो जाए।
श्री गुरु हरकिशन साहिब जी 5 वर्ष की आयु में ही गुरु नानक साहिब जी के आठवें गंदी सीन हो के दुनिया को सच का उपदेश दिया उस समय दिल्ली में जो महामारी फैली थी जिसे हैजा की बीमारी कहते हैं गुरुजी ने उस समय अमृत के द्वारा सब को नया जीवन दिया आज भी दिल्ली में उस स्थान पर लाखों लोग रोज नमस्कार करके अपने तन मन के रोग दूर करते हैं।


आज भी दिल्ली के अंदर 24 घंटे उनके दरबार में लंगर चलता है किसी भी जात पात के भेदभाव के बिना उसी तरह बिलासपुर में भी 24 घंटे जरूरतमंदों को भूखों को गुरु की अटूट लंगर की सेवा की जाती है। व गुरु वाणी सुनकर आई हुई संगत भी अपने आप को धन्य महसूस करने लगे।

इस महान कीर्तन दरबार में बाबा थाहीरिया सिंह दरबार उल्हासनगर के भाई साहब जसकीरत सिंह भाई साहब त्रिलोचन सिंह विशेष रुप से बिलासपुर पहुंचे इस कार्यक्रम में शामिल हुए और भक्तों को अपने दर्शन देकर आशीर्वाद देकर निहाल किया। 15 तारीख को 12:00 बजे
भोग साहेब पड़ा व विश्व कल्याण के लिए अरदास की गई इसी के साथ
तीन दिवसीय अखंड पाठ साहब का समापन हुआ।
दोपहर 1:00 बजे दरबार के सेवा धारियों के लिए नए भवन बनाने के लिए निर्माण का भूमि पूजन हुआ भाई साहब जसकीरत सिंह व भाई साहब त्रिलोचन सिंह जी के कर कमलों के द्वारा पूजा पाठ करके किया गया
प्रसाद वितरण किया गया।
भाई साहब जसकिरात जी ने कहा बहुत ही खुशी की बात है
दरबार के सभी सेवादारी जिस तरह गरीबों की दीन दुखियों की जरूरतमंदों की सेवा कर रहे हैं व प्रतिदिन जरूरत मंद लोगों को भोजन दिया जा रहा है यह सब कार्य देखकर सुनकर मन प्रसन्न होता है की गुरु के दिखाए हुए मार्ग पर सेवा कर रहे हैं और सेवा जारी है समय कोई भी हो सुख और दुख हो कभी घबराना नहीं चाहिए हमेशा अपने ग्रुरू पर विश्वास करना चाहिए जिस गुरु ने हमारे जीवन की रक्षा का बीड़ा उठाया है हमारी डोर उन्हीं के हाथ में है तो चिंता फिर किस बात की है। वाहेगुरु नाम है जहाज जो चडे सो उतरे पार। इस अवसर पर कई सेवा दरियो का शाल पहनाकर श्रीफल देकर भाई जसकीरत सिंह जी के द्वारा सम्मान किया गया।

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में
धन गुरु नानक दरबार के सेवा धारियों का विशेष योगदान रहा
जिनमे
दरबार के प्रमुख प्रबंधक हैं भाई साहब मुलचद नारवानी जी
डॉ हेमंत कलवानी जी सुरेश वाधवानी जी प्रकाश जाग्यासी
महेश लालचंदनी राहुल धनवानी
भोजराज नारवानी, दौलत राम पंजवानी, रमेश भगवानी, चंदू मोटवानी, बलराम रामानी, राजेश माधवानी, गंगाराम सुखीजा, दिलीप वाधवानी, राजू धामेचा, लक्ष्मण दयालानी, विकी नागवानी, विजय दुसेजा, जगदीश जाग्यासी

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