चंद्र उत्सव श्रद्धा-भक्ति और सादगी के साथ मनाया गया

श्री झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाटा स्थित मंदिर में संत लाल साई जी के द्वारा शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए वह करोना माह मारी को देखते हुए इस बार भी चंद्र उत्सव सादगी के साथ ऑनलाइन सोशल मीडिया के माध्यम से मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11बजे वरुण देव महायज्ञ से हुई। दोपहर 12 बजे भगवान झूलेलाल एवं बाबा गुरमुख दास जी के फोटो पर माला पहनाकर एवं बहराणा साहब की अखंड ज्योत प्रज्वलित करके की गई। अपनी अमृतवाणी में साइ जी के द्वारा सत्संग की वर्षा की गई। साईं जी ने सत्संग में बहराणा साहब की महिमा बताई।

उन्होंने बताया कि यह परंपरा सिंध से चली आ रही है, जब भी घर में खुशी होती है या शादी होती है या कोई मकान, दुकान का नव निर्माण होता है, या किसी की मनोकामना पूरी होती है तब इस शुभ कार्य में भगवान झूलेलाल जी का बहराणा साहब निकाला जाता है। पूजा होती है।

जब.जब अकाल पड़ता है या बारिश नहीं होती है। तब भगवान झूलेलाल जी को प्रसन्न करने के लिए बहराणा साहब निकाला जाता है। अभी जिस तरह पूरे विश्व में कोरोना महामारी विकराल रूप ले चुकी है, और दूसरी लहर चल रही है। प्रतिदिन हजारों लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। यह सब हमें अपने कर्मों का फल मिल रहा है।

प्रकृति के साथ जब भी खिलवाड़ होता है, तब-तब ऐसी अनहोनी घटनाएं होती रहती हैं। इसके जिम्मेदार हम खुद हैं विकास के नाम पर विनाश नहीं होना चाहिए, और दिन प्रतिदिन जो पाप बढ़ रहे हैं उसका भी फल हमें ही भुगतना पड़ रहा है।

अपर्ने इष्ट देव को भूल जाना उसकी पूजा-अर्चना नहीं करना अपने से बड़ों का सम्मान नहीं करना, कहीं ना कहीं इसकी सजा आज हमें इस महामारी के रूप में मिल रही है। भगवान ने हमें बार-बार चेतावनी दी भी किसी न किसी रूप में, पर हमें तो लापरवाह हो गए। कोई ऐसा समाज नहीं, कोई ऐसा मोहल्ला नहीं, कोई ऐसा शहर नहीं जिन्होंने अपने ने अपनों को खोया न हो।

अभी इसके बाद तीसरी लहर आने वाली है, अभी भी वक्त है जागो और प्रकृति के साथ खिलवाड़ मत करो। अपने से बड़ों का माता-पिता का अपमान मत करो। अपर्ने इष्ट देव को मत भूलो जितना हो सके पूजा भक्ति करो। जिस तरह बेटा गलती करता है तो बाप उसे क्षमा कर देते हैं माफी मांगने पर।

उसी तरह हमने जो गलती की है हम भगवान से अगर सच्चे मन से प्रार्थना करेंगे तो वह हमें जरूर माफ करेंगे। र्साइं के द्वारा कई भक्ति भरे भजन गाए गए। नव रत्ना तारे हैं आसमान में, वैसे ही पूरे जहां में एक ही है भगवान झूलेलाल…, ज्योति वारा झूलेलाल तू ही है पालनहार…, इस महामारी से तू ही बचा…,हम बालक है तेरे इस दुनिया को तू ही बचा।

इस अवसर पर शोभराज जसूजा अनिल पंजवानी भाई और रवि भाई जी के भी द्वारा भीं भक्ति भरे भजन गाए। इस दिल में बाबा गुरमुखदास आप रहते हैं…, जिसे हे भगवान झूलेलाल से प्यार वह हाथ ऊपर करें…, चादर में ढक जाए, पहंजे चरण में रख जाए, भगवान झूलेलाल…, जिये मुह्मजी सिंध…पार लगाईं इंदो दुखड़ा दूर कनो मुहंजो झूलेलाल…जैसे कई भक्ति भरे भजन गाए गए।

जिसे सुनकर भक्तजन घर बैठे ही भाव-विभोर हो गए। कार्यक्रम के आखिर में आरती की गई। अरदास की गई, पल्लो पाया गया। कोरोना महामारी जल्द से जल्द खत्म हो जो व्यक्ति हॉस्पिटल में है वह जल्द से जल्द स्वस्थ होकर घर पहुंचे और जो इस दुनिया में नहीं है उनकी आत्मा को भगवान झूलेलाल अपने चरणों में स्थान यह प्रार्थना सभी के लिए की गई। बहराणा साहब को मंदिर से लेकर तालाब पहुंचे।

जहां पर विधि-विधान के साथ र्साइं जी के द्वारा पूजा-अर्चना की गई व विसर्जन किया गया। ज्योत को टराया गया। उस समय एक ऐसी घटना घटी जिसे देखकर हम भी हैरान हो गए। जब तालाब पहुंचे तब कड़क धूप थी जैसे-जैसे पूजा-अर्चना बढ़ती गई, अचानक मौसम ने करवट बदली और रिमझिम-रिमझिम बारिश होने लगी।

जब वापस मंदिर पहुंचे कुछ समय बाद वापस बादल छठे व धूप निकल गए। अब आप इसे मौसम की बदली समझे या भगवान झूलेलाल का आशीर्वाद समझे। जो क्षणों के लिए हमें मिला वह चले गए। यह पहली बार नहीं हुआ है कई बार ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं जब भी साई जी के साथ कभी कहीं सत्संग होता है और वहां बहराणा साहब की पूजा होती है

या कथा होती है तब कई बार अचानक बादल छा जाते हैं और रिमझिम-रिमझिम बरसात शुरू हो जाती है। इस पूरे कार्यक्रम का प्रसारण सोशल मीडिया के माध्यम से लाइक किया गया। हजारों की संख्या में भक्तों ने घर बैठे सत्संग चंद्र दिवस कार्यक्रम का आनंद लिया।

साईं जी ने सभी को चंद्र दिवस की बधाई दीं सभी परिजन अपने-अपने घरों में चंद्र दिवस मनाए शाम को घरों के बाहर दीपक जरूर जलाएं। शासन के नियमों का पालन करें घर में रहें, सुरक्षित रहें मार्क्स जरूर पहने घर से बाहर जरूरत ना हो ना निकले।

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