अपने सुख के भंडार की चाबी दूसरों के जेब में नहीं रखना चाहिए-जैन मुनि पंथक

0

बिलासपुर-किसी में शारीरिक कमी होना और अभद्र प्रकार की रहन-सहन होने के बावजूद भी किसी को भी अपनी बदनामी व उपहास हो वह मंजूर नहीं होता है, और समझदार व्यक्ति को ऐसे व्यक्तियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए । यह बातें टिकरापारा स्थित जैन भवन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने अपने व्याख्यान में कहीं ।


उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति का पारिवारिक जीवन व सामाजिक जीवन आनंदमई व विकासशील वह हरा भरा रखने के लिए अपने साथ रहने वाले वाला सहकर्मी की कार्य पद्धति को समझ लेना व उसे स्वीकार करना बहुत आवश्यक है । साथ-साथ चाहे उनके साथ अपना वैचारिक मतभेद क्यों ना हो फिर भी परस्पर अंडरस्टैंडिंग होना बहुत जरूरी है, लेकिन इस प्रकार का जीवन व्यवहार नहीं होता है तब समझ ले कि हम हमारे सुख के भंडार की चाबी दूसरों के जेब में रख देते हैं । ऐसी परिस्थिति में हम अपने आत्मीय भाव व आत्म कल्याण हो, ऐसी स्थिति में रह सकता नहीं है क्योंकि अपना पूरा समय दूसरों के कार्यों के नुक्स निकालने में ही चला जाता है । इन कारणों से ही अपने पास सुख का भंडार होने के बावजूद भी सुख भोग नहीं सकते ।


जैसे कि हमें खुद तो खाना बनाना आता नहीं है और हाउसकीपिंग भी ठीक से कर सकते नहीं है, और फिर भी जो लोग यह सुचारु रुप से करते हैं उसके बारे में बाहर उनके कामों में खामियाँ निकाल कर उनका अपमान करके हम हमारा सात्विक सुख न भोग कर दुखी तो होते ही हैं और दूसरों को भी दुखी करते हैं । जो हमें सुखी होना है तो हर परिस्थिति को स्वीकार करें और दूसरों के अस्तित्व उनकी परिस्थिति को भी स्वीकार करें ।


समाज के अध्यक्ष भगवानदास सुतारिया ने बताया कि विगत 5 जुलाई से लगातार चातुर्मास ऑनलाइन व्याख्यान चल रहा है । जिसमें शहर के अलावा अन्य स्थानों से भी लोग धर्म लाभ ले रहे हैं । समाज में बच्चों को घर के बड़े धर्म ध्यान करवाते हुए उन्हें प्रतिदिन प्रतिक्रमण, सामायिक, उवसग्गहरं स्त्रोत, शांतिनाथ छंद, मांगलिक और 24 तीर्थंकर के नाम कंठस्थ करवाया जा रहा हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here