संतो की महिमा अपरंपार है- साई काली राम

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श्री झूलेलाल चालिहा उत्सव झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाटा में वशणशाह दरबार उल्हासनगर के संत साईं परमानंद के पुत्र प्रिंस साई काली राम का हुआ । मंदिर में प्रवेश करते हुए प्रिंस साइ काली राम जी ने भगवान झूलेलाल एवं बाबा गुरु दास जी की मूर्ति पर माला पहना कर पूजा अर्चना करके मत्था टेका।

कार्यक्रम रात 10से 12 तक चला। कार्यक्रम में ग्वालियर से जावेद म्यूजिकल पार्टी के द्वारा संगीत मैय भजनों की प्रस्तुति दी गई। 12 बजे से अमृतवेला तक प्रिंस साई कली राम ने अपने भजनों से ऐसा समा बांधा कि वक्त का पता ही नहीं चला।

उन्होंने एक संत की कथा सुनाते हुए बताया कि आजादी की पहले की बात है सिंध के एक गांव में एक किसान जो कि गांजा की सप्लाई करता था। 1 जिले से दूसरे जिले एक दिन वह गांजा बोरे में भरकर लेकर जा रहा था। रास्ते में पुलिस वालों ने उसे रोका और पूछा इसमें क्या है।

तो उसने जवाब दिया इसमें अनाज है हरी सब्जियां पत्ते हैं। पुलिस वाले ने सोचा चलो घर का राशन पानी का आज इंतजाम हो गया। उसने कहा बोरा खोलो जैसे ही बोला खोला गया उसमें गांजा था पुलिस वाले ने कहा झूठ बोलते हो गांजा लेकर आते हो। जानते हो ना गांजा बेचना कानूनन जुर्म है व्यक्ति ने कहा साहब जी कुछ लेके मामला रफा-दफा करो ।

पुलिसवाला और गुस्सा हो गया बोला एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी चलो सीधा थाने। थाने लाकर उसे पूछा सच-सच बताओ किसके लिए काम करते हो और यह गांजा किस के लिए लेकर जा रहे थे। वह इंसान सोचे लगा किसका नाम लूं तो उसने सिंध के एक संत का नाम ले लिया।

पुलिस वाले ने कहा सच बोल रहे हो उसने कहा हां साहब इन्सपेक्टर ने हवलदार को कहा जाओ और उस संत को लेकर आओ। हवलदार दरबार साहब पहुंचा और उस संत को सारी बातें बताएं संत ने कहा हमने तो कोई गांजा नहीं मंगाया है। फिर उसने हमारा नाम कैसे ले लिया।

हवलदार ने कहा मुझे नहीं मालूम लेकिन इन्सपेक्टर साहब आपको बुला रहे हैं आप साथ में चलो व संत हवलदार के साथ थाने पहुंचा। इन्सपेक्टर संत को देखकर शांत हुआ और कहा साईं जी यह व्यक्ति कहता है कि आपने गांजा मंगाया है।

संत ने कहा मैंने कोई गांजा नहीं मंगाया है और इस बोरी में गांजा नहीं है। एक किसान ने कहा कि मेरी बाड़ी में हरी सब्जियां हैं जो आपके पशु आहार के लिए काम आएगी तो मैंने कहा था ले आना यह वही है। इन्पेक्टर गुस्सा हो गया और बोला संत जी यह देखो टेबल में गांजा पड़ा है और आप कहते हैं कि इसमें हरी पत्तियां और सब्जियां हैं।

संत ने कहा टेबल में जो गांजा है वह किसका है मुझे नहीं पता पर इस बोरी में गांजा नहीं है अगर विश्वास ना हो तो खोल कर देख लो। इन्सपेक्टर ने जोर से लात मारी बोरे पर बोरा खुल गया और हरी पत्तियां बाहर निकल आई इस्पेक्टर सोचने लगा यह कैसे हो गया। संत ने कहा देखो मैंने जो कहा सही है ना।

अब इस किसान को छोड़ दो और यह बोरा भी ले जाने दो। थाने से बाहर आने के बाद उसके सामने कहा संत जी आपने आज मुझे बचा लिया। आगे से मैं ऐसा कभी गलत काम नहीं करूंगा। बाहर आकर जैसे इसने बोरा खोला तो उसमें गांजा का किसान देख कर हैरान हो गया और समझ गया यह सब चमत्कार और संत का है।

जैसे ही व संत दरबार साहब पहुंचा। तो यह सारी बातें उसे गुरु को पता चल गई थी उनके गुरु नीचे आकर बहुत क्रोधित हो रहे थे मैंने तुम्हें कहा था कि कभी भी अपनी शक्ति का दिखावा मत करना चमत्कार कभी मत दिखाना फिर तुमने आज क्यों दिखाया । उस संत ने कहा अपने गुरु से मैंने कोई चमत्कार नहीं दिखाया है यह चमत्कार तो आप ही का है। जब मैं यहां से जा रहा था तो आप ही का नाम लेकर जा रहा था यह सब तो आप ही के नाम का चमत्कार है।

इस कहानी का तात्पर्य है कभी भी अपनी शक्ति का दिखावा न करें और जो भी कुछ अच्छा करते हैं तो मैंने किया मैंने किया ऐसा कभी ना करें। मैं जो करता है वह मर जाता है और जो बोलता है तुमने क्या तुमने क्या वह तर जाता है। उस संत ने भी अपनी करामत अपने चमत्कार को गुरु के नाम दिया।

क्योंकि गुरु के बिना तो सब सुन हैं जो मिला है वह गुरु के द्वारा ही मिला है। जो मिलेगा वह गुरु के द्वारा ही मिलेगा इसलिए गुरु से बड़ा है ना कोई गुरु भक्ति में ही शक्ति है गुरु नाम है अनमोल जप ले प्यारे पियारे जाप लाले गुरु नाम है अनमोल। ऐसे कई उदाहरण व संतो के प्रसंग व सई वासन शाह दरबार से जुड़ी सच्ची कथाएं और बातें बताई। वह अपने भजनों से भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

चालिहा आया है भगवान झुलेलाल का…,चादर में ढक जाए बाबा गुरमुखदास…, ज्योति वारा झूलेलाल…,बेड़ा पार लगाई नो…कार्यक्रम के आखिर में संत लाल दास जी के द्वारा प्रिंस साईं काली राम जी का सम्मान किया गया।

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वह बाबा गुरमुख दास सेवा समिति के सदस्यों के द्वारा फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया। तत्पश्चात आरती की गई। अरदास की गई पल्लो पाया गया और प्रसाद वितरण किया गया। शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के कई शहरों से आए थे।

बिलासपुर चकरभाटा, बिल्हा, भाटापारा, तिल्दा, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, गोंदिया, चांपा, रायगढ़, धूलिया, नागपुरव कई शहरों से भक्तजन पहुंचे थे। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बाबा गुरमुखदास सेवा समिति सिंधी पंचायत पंचायत चकरभाटा, श्री झूलेलाल महिला सखि सेवा ग्रुप के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

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