अक्षय तृतीया का पर्व है 14 को, जाने विस्तार से पर्व का महत्व

The festival of Akshaya Tritiya is on 14th, know the importance of the festival in detail
अक्षय तृतीया का पर्व है 14 को, जाने विस्तार से पर्व का महत्व

अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष 14 मई को मनाया जाएगा। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि शुभ और मांगलिक कार्य को करने के लिए अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत ही शुभ माना गया है। इस तिथि में किए गए कार्य का फल अक्षय माना जाता है। इसी कारण शुभ कार्यों के लिए अक्षय तृतीया को विशेष महत्व दिया जाता हैं। इस लेख से पर्व के महत्व को बताएंगे।

हर शुभ काम कर सकते है इस दिन

अक्षय तृतीया में शादी-विवाह, गृह प्रवेष, नया व्यापार, वाहन, भूमि, भवन, नया कारोबार आरंभ करना बहुत ही शुभ माना जाता है। पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहते है।

इस कारण भी इस तिथि को शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया पर वाहन खरीदना, गृह प्रवेश करना, आभूषण खरीदना, भूमि संबंधी कार्य, बाजार में निवेश, नवीन व्यापार का आरंभ जैस लगभग सभी कार्य किए जा सकते है।

भगवान परशुराम का हुआ था जन्म

अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दि नही भगवान विष्णु के चरणों से धरती पर गंगा अवतरित हुई थी। इसके साथ ही सतयुग, द्वापर और त्रेतायुग के आरंभ की गणना अक्षय तृतीया से मानी गई है।

दान करना होता है इस दिन श्रेष्ठ

अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन दान करने से कई गुणा अधिक पुण्य मिलता है। इस दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली, कपड़ा, मटका, सत्तू, फल जैसे कई तरह की चीजों का दान करना उत्तम होता है।

पूजा विधि

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के साथ-साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। तीनों देवी-देवताओं को केला, नारियल, पान-सुपारी, मिठाई और जल चढ़ाए। कुछ देर भगवान के सामने हाथ जोड़कर उनकी प्रार्थना करे और उनसे आशीर्वाद मांगे।

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