निगम ने गोबर से बनी लकड़ी से अंतिम संस्कार करने शुरू की नेक पहल

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बिलासपुर. नगर निगम बिलासपुर ने लकड़ी की जगह गौ-काष्ठ यानि गोबर से बनी लकड़ी से अंतिम संस्कार करने को लेकर पहल की है।

इसके लिए निगम ने मोपका और सकरी मुक्तिधाम में गौ-काष्ठ निर्माण के लिए मशीनें लगाकर इसका निर्माण शुरू किया है। आपको बता दें कि संभाग में अपनी तरह का यह पहला प्लांट है।

इससे जलाऊ लकड़ी की खपत कम होगी और पेड़ों की अवैध कटाई में कमी लाने के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी किया जा सकेगा। नगर निगम बिलासपुर के अनुसार श्मशान घाट में हर महीने हजारों क्विंटल लकड़ी अंतिम संस्कार के लिए लगती है।

यह लकड़ी व्यापारियों से खरीदी जाती है, जो की कहीं न कहीं हरे भरे पेड़ो की कटाई कर दी जाती है। इससे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

इसे देखते हुए बिलासपुर के महापौर रामशरण यादव ने शहर के मुक्तिधामों में गौ-काष्ठ ,गोबर से बनी लकड़ी से मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार क राने की योजना बनाते हुए मशीन खरीदी का प्रस्ताव बनाया था।

जिसकी स्वीकृती के बाद महापौर मद से नगर निगम ने 90,000 रुपए प्रति मशीन की दर से पांच मशीनों की खरीदी की है। इसमें दो मशीनों को मोपका और तीन मशीनों को सकरी मुक्तिधाम में लगाया जा रहा है।

यहां गोबर से लकड़ी बनाने के लिए शहर व आसपास की डेयरियों और पशुपालको से संपर्क कर उनसे शासकीय दर पर गोबर की खरीदी की जा रही है। जिस गति से गौ-काष्ठ बनाने का कार्य चल रहा है निगम का अनुमान है कि अगले दो महीने में अंतिम संस्कार के लिए यहां भरपूर लकड़ी उपलब्ध होगी।

लागत भी आएगी कम

महापौर रामशरण यादव ने बताया कि सामान्य जलाऊ लकड़ी की कीमत करीब 700 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि एक क्विंटल गौ-काष्ठ करीब 400 रुपए प्रति क्विंटल में उपलब्ध होगी। इससे अंतिम संस्कार में लकड़ी का खर्च भी कम होगा। इतना ही नहीं इसके उत्पादन को बढ़ाकर भविष्य में होलिका दहन, होटलों व अलाव में भी गौ-काष्ठ का उपयोग किया जाएगा।

एक अंतिम संस्कार में लगती है दो पेड़ों के बराबर लकड़ी

एक अंतिम संस्कार में औसतन पांच से छह क्विंटल लकड़ी लगती है। इस हिसाब से एक सामान्य साइज के पेड़ से दो से तीन क्विंटल लकड़ी निकलती है। अर्थात एक अंतिम संस्कार में औसतन दो पेड़ के बराबर लकड़ी की खपत होती है।

महापौर रामशण यादव ने पेड़ों और पर्यावरण को बचाने के लिए गौ.काष्ठ का उपयोग करने की योजना बनाई। जिसके बाद अब शहर के मुक्तिधाम में गौ-काष्ठ का उपयोग किया जाएगा।

स्वच्छ शहर और पर्यावरण संरक्षण में सहायक

निगम महापौर रामशरण यादव का कहना है कि शहर के मुक्तिधामों में गौ-काष्ठ ,गोबर से बनी लकड़ी बनाने की शुरुआत हो चुकी है। आगामी एक-दो महीने में यह पूर्ण रूप से प्रारंभ हो जाएगी।

इससे शहर भी स्वच्छ और पर्यावरण संरक्षण भी हो सकेगा। गौ.काष्ठ सामान्य लकड़ी से कम दाम पर मिलेगी, वहीं अंतिम संस्कार के लिए सामान्य जलाऊ लकड़ी का उपयोग भी बंद होने से पेड़ बचेंगे।

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