इसलिए भगवान शंकर माने जाते है आदर्श पति, कुंवारी कन्यां भी करती है उनकी तरह पति की कामना

मनचाहा पति पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत करने की परंपरा रही है। आखिर युवतियां सनातन काल से क्यों शिव को ही अपने पति के रूप में पाने के लिए सावन महीने के सोमवार को व्रत करती है। भगवान षंकर को क्यों माना जाता है आदर्श पति, क्यों हर लड़की चाहती है उनके जैसा पति। इस लेख के माध्यम से हम इसके पीछे के कारण को बताएंगे।
भोलेनाथ वैरागी, भस्मधारी, शमशानवासी है फिर भी कन्याओं के लिए वो आदर्ष पति है। भोलेनाथ की महिमा ही अलग है वो न तो मोह माया में फंसे है और न ही जीवन के किसी भी सुख-सुविधाओं का भोग करते दिखते है। महादेव तो महादेव है जो भी उनको समझता है बस उनका ही गुणगान करता है।


0 पूरा है महादेव का परिवार
शिव महावैरागी और सृष्टि का संहार करने वाली महाशक्ति भी है, लेकिन इसके साथ ही शिव से ज्यादा सांसारिक भ्गवान भी कोई नहीं है। शिव एकमात्र भगवान है इंद्र को छोड़कर। जिनका पूरा परिवार है। उनके गणेश और कार्तिकेय पु़त्र है तो अशोक सुंदरी उनकी पुत्री भी है। शिव के अलावा किसी भी भगवान का पूरा परिवार नहीं है। शिव की यह खूबी उन्हें सबसे अलग करती है। सभी महिलाओं को भरा-पूरा परिवार ही भाता है। इसलिए शिव की कामना करती है।


0 सारे मनोरंजन का उद्भव हुआ है शिव से
इस संसार के सारे मनोरंजनों का उद्भव भी भगवान शिव से ही माना जाता है। 64 कलाएं और सारी क्रीड़ाओ के जनक षिव ही है। दूसरे की भावनाओं को भी तरजीह देन बहुत अच्छे से जानते है।
0 पत्नी को देते है समय
शिव अपनी पत्नी पार्वती को इतना प्रेम करते है कि उनकी बोरियत को दूर भगाने के लिए हमेषा संवाद करते दिखते है। सनातन धर्म के ज्यादातर पुराण और व्रतों की कहानियों की शुरुआत में हमेशा पाएंगे कि शिव-पार्वती को कथा सुना रहे है; यही कथा पुराण या व्रत कथा बनती है।


0 पत्नी स्वतंत्रता को देते है महत्व
शिव हमेषा पार्वती को स्वतं़़त्र रखते है। सिर्फ शिव की ही पत्नी है जो विभिन्न अवतार लेकर राक्षसों का संहार करती है। वह शक्तियों को धारण कर स्वतंत्र रूप से कार्य करती है, जहां अन्य देवता अपनी पत्नियों को सहायक के रूप में रखते है। वहीं पार्वती शिव से पूर्ण रूप से स्वतंत्र होकर भी कार्य करती है। आधुनिक युग में पार्वती जैसे स्वतंऋता हर एक स़्त्री की कामना होती है।


0 पत्नी के मान व सम्मान का ध्यान
भगवान शिव से ज्यादा अपनी पत्नी का ख्याल रखने वाले कोई दूसरे देवता नहीं है। शिव अपनी पत्नी पार्वती से जितना प्रेम करते है उतना देवताओं में कोई भी अपनी पत्नी से नहीं करता। ऐसी बात महाकाव्यों में भी उल्लेखित है। शिव की पत्नी पार्वती जब गुस्से में महाकाली का रूप धारण करती है तो वे उनका गुस्सा शांत करने उनके पैरों के नीचे आ जाते है। इसे नारी वाद का सबसे पहला उद्घोश माना जा सकता है। शिव अपनी पत्नी पार्वती को हमेशा बराबरी का आसन देते है। पति और पत्नी के बीच बराबरी का यह भाव किसी भी स्त्री को हमेशा अच्छा लगेगा।

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