गरूड़ पुराण की दस महत्वपूर्ण बातें, जाने विस्तार से रहस्य

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गरूड़ पुराण में भगवान विष्णु की भक्ति के अलावा व्यक्ति के कर्मों और उस आधार पर उसके अगले सफर का वर्णन किया गया है। हिन्दू धर्म में गरूड़ पुराण का बहुत महत्व है।

इसका पाठ आमतौर पर किसी की मृत्यु के बाद करने की परंपरा है। इसमें भगवान विष्णु की भक्ति की महिमा, मृत्यु और उसके बाद अगले जन्म की बात कही गई है।

इसके एक भाग में बताया गया है कि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति के आत्मा का अगला सफर कैसा होता है। व्यक्ति के कर्मों और पापों के आधार पर गरूड़ पुराण के पांचवें

अध्याय में यह भी बताया गया है कि वह अगले जन्म में क्या बनेगा। इस पुराण में श्राद्ध-तर्पण, मुक्ति के उपायों आदि का भी विस्तृत वर्णन मिलता है।

पक्षीराज गरूड़ ने पूछे थे सवाल

पक्षीराज गरूड़ को भगवान विष्णु का वाहन बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार गरूड़ जी ने एक बार भगवान विष्णु से मृत्यु के बाद प्राणियों की स्थिति, उसकी यमलोक यात्रा, कर्मों से प्राप्त होने वाले फल, अगले

जन्म, पापियों को मिलने वाली सजा जैसे सवाल पूछे थे। भगवान विष्णु ने तब गरूड़ की जिज्ञासा शांत करते हुए उन्हें जो उपदेश दिए उसी का इसमें जिक्र है। इसलिए इस पुराण को गरूड़ पुराण कहा गया है।

पाप के आधार पर अगले जन्म में क्या बनते है जाने

पहला-गरूड़ पुराण में कहा गया है जो व्यक्ति अपने किसी दोस्त से धोखा करता है या उन्हें ठगता है। ऐसे व्यक्ति पहाड़ों पर रहने वाले गिद्ध बनते है। वे तब अपना पेट भरने के लिए मरे हुए जानवरों को खाते है।

दूसरा-गरूड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति धर्म का विरोध करता है या उसका पालन नहीं करता तो वह कुत्ते, गधे या ऊंट के रूप में जन्म लेता है। साथ ही अगर कोई मनुष्य नारी की हत्या करता है तो अपने अगले जन्म में वह कोढ़ी बनता है।

तीसरा-किसी दोस्त की पत्नी पर बुरी नजर रखने वाला व्यक्ति गधे के रूप में जन्म लेता है। वहीं दूसरे की पत्नी

से संबंध बनाने वाला व्यक्ति घोर नरक में जाता है। इसके बाद उसे भेड़िया, कुत्ता, गिद्ध, सियार, सांप, कौआ और अंत में बगुला की योनि प्राप्त करता है।

4था-ऐसा ही विवाहेत्तर संबंध में दिलचस्पी रखने वाली औरतें अगले जन्म में चमगादड़ बनती है। वहीं स्त्री पर हाथ उठाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में भी विभिन्न प्रकार के कष्टों और बीमारियों से जूझता है।

पांचवा-जो लोग अक्सर अपने माता-पिता, भाई-बहन या फिर गुरू के साथ बुरा व्यवहार करते है या उन्हें प्रताड़ित करते है।

उनका अगला जन्म तो होता है लेकिन कई जन्मों तक वे धरती पर नहीं आते और गर्भ में ही उनकी मृत्यु हो जाती है।

छठवां-गरूण पुराण में ये भी कहा गया है कि सुयोग्य पात्र को शिक्षा नहीं देने वाले ब्राम्हण अगले जन्म में बैल बनते है।

सातवां-चालाकी या कपट कर दूसरे व्यक्ति को धोखा देने वाला मनुष्य अगले जन्म में उल्लू बनता है।

आठवां-सास-ससुर को अपशब्द कहने वाली और अक्सर कलह करने वाली स्त्री जलौका यानी जल जोंक होती है।

अपने पति का परित्याग करके परपुरूष का सेवन करने वाली स्त्री वल्गुनी, छिपकली अथवा दो मुंह वाली सर्पिणी बनती है।

नौवां-गरूड़ पुराण के अनुसार ब्रम्ह हत्यारा क्षय रोगी होता है। गाय की हत्या करने वाला मूर्ख और कुबड़ा होता है।

दसवां-द्वेष वश या कोई आरोप लगाकर स्त्री का परित्याग कर देने वाला बहुत काल तक चक्रवाक मतलब चकोर होता है। ये एक प्रकार का पक्षी है जिसके बारे में कहा गया है कि इसकी बोली कर्कश होती है।

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