पाॅकेट मनी से शुरु किया था दिव्यांगों की मदद करना, अब रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा अभय

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व्यक्ति अपनी सफलता के लिए दिन-रात एक कर आगे बढ़ता है। सफलता हासिल भी कर लेता है लेकिन कहीं न कहीं कुछ अधूरा ही लगता है। अधूरा पन समाज के प्रति कुछ न करने से लगता है। ऐसे में समाज के प्रति इंसान होने का कर्तव्य निभाना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जिसे वह खुद ही समझता है। इसके लिए किसी जोर-जबरदस्ती की जरूरत नहीं पड़ती है।

मैंने जब अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और काॅलेज में कदम रखा तब मेरा ध्यान समाज सेवा की ओर गया और मुझे मानव के तौर पर असहाय, लाचार व जरूरतमंदों की सेवा करने का ख्याल आया। तब मैंने इसकी शुरुआत पाॅकेट मनी से मिले कुछ पैसे से किया। जब पहली बार किसी जरूरतमंद की सहायता की तब मन में एक अलग ही अहसास हुआ। तब से मैंने ठान लिया कि अब मुझे समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करते हुए मानवता निभानी है। यह कहना है समाज सेवा का कार्य करने वाले यूथ संस्कार फाउंडेशन के अभय दुबे का।

अभय ने बहुत कम उम्र में ही समाज सेवा का कार्य करना शुरू कर दिया। पहले जरूरतमंदों व असहाय लोगों की सहायता की। फिर धीरे-धीरे दिव्यांगों की सहायता को महत्व देते हुए उनके लिए कार्य करना शुरू किया। अभय बिलासपुर शहर के वह युवा है जो पढ़ाई के साथ समाज सेवा का कार्य कर एक अलग पहुचान बना चुके है। वहीं अभय अब छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग में रिसर्च असिस्टेंट का कार्य में जुटे है। जहां पर कृषि से जुड़े कई रिसर्च कर रहे है। हाल ही में उन्होंने गाय के गोबर से पुट्टी बनाया और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए इस पर कार्य किया।

पाॅकेट मनी से की थी सहायता

अभय दुबे ने बताया कि वह समाज सेवा का कार्य करना चाहता था। इसकी शुरुआत पाॅकेट मनी के पैसे से की थी। अभय को पहली बार में बहुत ही अच्छा अनुभव हुआ और वह फिर इस कार्य को धीरे-धीरे करते रहे। इस कार्य को करते हुए समाज की बुराईयों व कुरितियों को समझकर उसे दूर करने के विषय में भी कार्य करते रहे। जिसमें सबसे ज्यादा दिव्यांगों को हो रही समस्याओं को जाना और समझा। फिर उन्हीं को फोकस करते हुए कार्य किया। इस कार्य में कुछ समाज सेवी भी जुड़े और सहयोग किया।

शुरु किया यूथ संस्कार फाउंडेशन

अभय ने बताया कि समाज सेवा का कार्य करने उसने युवाओं को खुद के साथ जोड़ने का कार्य करना चाहा। इसके लिए सबसे पहले यूथ संस्कार फाउंडेशन बनाया। जिसमें दिव्यांगों के लिए कार्य करने युवाओं को प्रेरित किया। वर्ष 2014 से इस कार्य को सक्रिय रूप से कर रहे है और लगातार दूसरे युवाओं को भी अपने साथ जोड़ रहे है। अभय ने बीबीए, एमबीए, एमएसडब्ल्यू, पीजीडीसीए की शिक्षा ग्रहण की है। रिसर्च के माध्यम से पीएचडी की तैयारी कर रहे है।

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राइटर पैनल की शुरुआत की

यूथ संस्कार फाउंडेशन के माध्यम से ही राइटर पैनल की शुरुआत की। जिसका मुख्य उद्देश्य दृष्टि बाधित बच्चे व युवाओं की सहायता करना। ताकि वे शिक्षा के दौरान राइटर प्राप्त कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ अपने आपको समाज की मुख्य धारा से जोड़ सके। इसमें बहुत से युवाओं को जोड़ा आज राइटर पैनल ने कई दिव्यांग बच्चों की सहायता की है।

लगातार कर रहे है रिसर्च

अभय ने सबसे पहले दिव्यांगों के लिए पैर से चलने वाले माउस बनाने का कार्य किया। फिर कोरोना के दौरान सेनेटाइजर मशीन अपने दोस्त डाॅ.पुरुषोत्तम के साथ मिलकर बनाया। अब कृषि के क्षेत्र में जुड़कर नया-नया रिसर्च कर रहे है।

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