आत्म रक्षा के लिए श्रीयांशी और वैष्णवी ने सीखना शुरु किया मार्शल आर्ट, अब जीत रही है मेडल

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खेलने कूदने के साथ आत्मरक्षा का गुण वर्तमान समय में लड़कियों को सीखना बहुत जरूरी है। आज के परिवेश में हर बालिका को अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए श्रीयांशी व वैष्णवी को उनके माता-पिता मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेने प्रेरित किया। इन दोनों ही बच्चियों ने मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेते हुए अब मेडल भी जीत रही है।

मार्शल आर्ट को खेल-खेल में सीखना शुरु किया और अब उनको इसमें मन लग गया है दूसरे शहरों में होने वाले प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर मार्शल आर्ट का प्रदर्शन कर मेडल जीत रही है। श्रीयांशी व वैष्णवी दोनों ही सगी बहने है। वैष्णवी 11 वर्ष की है और श्रीयांशी 6 वर्ष की है। दोनों इस आर्ट की बारिकियां सीख कर सेल्फ डिफेंस सीखते हुए आगे बढ़ रही है।

एक साल ही हुआ है मार्शल आर्ट सीखते

वैष्णवी व श्रीयांशी स्वर्णकार के माता-पिता कामिनी स्वर्णकार व अतुल स्वर्णकार ने बताया कि बच्चों को कुछ न कुछ तो सीखाना था। पहले स्वीमिंग फिर भारतनाट्यम जैसे डांस का प्रशिक्षण देना चाहा। लेकिन बच्चों का मन नहीं लगा। फिर आत्मरक्षा के लिए इन्हें मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेने के लिए कोच दयाल साहू व किरण साहू के पास लेकर आए। जहां पर बच्चे काफी उत्साह से मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण ले रही है।

कोच से प्रभावित है दोनों बच्चियां

वैष्णवी व श्रीयांशी दोनों ने ही कहा कि जब वे मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुंची तो कोच किरण साहू को देखकर प्रेरणा मिली। कम उम्र में किरण ने भी कई मेडल जीते है। जो बच्चियों को आत्मरक्षा के गुण सीखाती है। हमें उनको देखकर बहुत अच्छा लगता है। हम भी उनकी तरह ही इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है।

नेशनल में जीते है मेडल

श्रीयांशी व वैष्णवी दोनों ने ही तीन नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जिसमें अभनपुर, रायपुर व बिलासपुर में हिस्सा लेकर मेडल जीते है। फाइट में गोल्ड व काता में सिल्वर व ब्राउंस मेडल जीते है। वैष्णवी स्वर्णकार कक्षा 5वीं ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल बहतराई में पढ़ती है। श्रेयांशी स्वर्णकार कक्षा-1 सन साइन किड्जी में पढ़ती है।

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