विश्व की सर्वश्रेष्ठ व उत्तम संस्कृति के वारिस है सिंधी समाज -महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम

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रायपुर। भारतीय सिंधु सभा युवा विंग के तत्वावधान में संत समागम एवं सिंधी समाज के जन जागरण हेतु जूम एप पर वेबिनार के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग का राष्ट्रीय स्तर पर बहुद्देशीय आयोजन किया गया।कार्यक्रम का प्रारंभ भारतीय सिंधु सभा युवा विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीए चेतन तारवानी के स्वागत भाषण से हुआ उन्होंने कहा युवओ से अपील है कि समाज हेतु एकजुट होने का एक भी अवसर न खोएं। सेवा लाभरत दिनेश अठवानी ने आगे बताया कि सिंधी संतों की शीतल छाया में सैकड़ों साध- संगत ने पुण्य लाभ कमाया। निश्चित ही समाजहित में रायपुर छग से संत युधिष्ठिर लाल ने अपने उद्बोधन में कहा संगठन में ही शक्ति है।।युवा लीडरशिप में समाज साहस- धैर्य- विनम्रता -सच्चाई द्वारा संगठन बनाकर लक्ष्य निर्धारित कर सफलता पा सकता है। विशेषकर नारी शक्ति (मातृ शक्ति) के सम्पूर्ण सम्मान से ही हम समाज की कुरीतियों पर विजय पा सकते हैं।

रामायण व महाभारत का उदाहरण देकर बताया,भगवान राम के बनाए संगठन द्वारा वानर सेना ने अभेद्य लंका पर विजय पाई एवं 5पांडवों को एकजुट व आस्थावान बनाकर भगवान कृष्ण ने 100कौरवों ,महाबली कर्ण,गुरू द्रोणाचार्य जैसे विश्व विजेताओं के होते हुए पांडवों को विजय दिलाई। स्वामी अशोकानंद महाराज जबलपुर ने बताया गुरूविहीन शिष्य,जड़विहीन वृक्ष की भांति होता है।।ज्ञानवान होने से ही सरस्वती व लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है। हरिद्वार से डा स्वामी गंगादास उदासीन जी ने सीधे-सीधे विषय पर बोलते हुए समाज हेतु कहा आप अपनी भाषा व संस्कृति के बगैर सिंधी सभ्यता को नहीं बचा पाएंगे,तत्संबंध में कहा मुहिंजो बाबो सिंधी- मां भी सिंधी- छल मुहिंजा बार भी रहन सदाईं सिंधी।

संतोष कुमार महाराज :आज के समय में सिंधी समाज के बच्चों की सगाई और शादी के बाद रिश्ते टूटने की घटनाएं देखने को मिल रही हैं।।उस हेतु माता-पिता द्वारा संस्कार देने में कमी व अत्यधिक मोह होने से बच्चों का आधार कमजोर होना बताया। युवाओं में अमर्यादित आचरण व आदतन गलत होने का आदी होना बताया। स्वामी हंसराज भिलवाड़ा ने बताया,विश्व की सर्वश्रेष्ठ व उत्तम संस्कृति के वारिस सिंधी समाज हैं । अखंड भारत के मूल निवासी लाचार होकर अपनी धरती माँ को छोड़ विस्थापित कहलाए। धर्म परिवर्तन पर बोलते हुए स्वामी हंसराज जी ने कहा, इतनी पुरानी सभ्यता के वारिसों ने न ही स्कूल खोले,न ही धर्म प्रचार पर जोर दिया।।नये-नये आए इसाई व ईस्लाम धर्म को ग्रहण करने में अपने अन्य हिंदू भाइयों की देखा- देखी सिंधी समाज भी पीछे नही रहा

इस धार्मिक आयोजन में सांस्कृतिक पृष्ठभूमि तैयार की अरुधन बत्रा की गायिकी एवँ श्री राजेश परसरामानी के सारँगी की धुन वैष्णव जन तो तेने कहिए से समा बाँधा . सिंधी सारँगी के.सिँधु घराना हेतु सभी ने राजेश जी को बधाई व शुभकामनाएं दी अरुधन बत्रा की गायिकी ने सभी को मंत्रमुग्ध किया एवँ सभी से निवेदन किया गया कि 27 जून को विश्व सिंधी सारँगी दिवस मनाया जाए।

आज के वेबिनार में आज शामिल रहे प्रमुख गणमान्य संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुंबई से लद्धाराम नागवानी कार्यवाहक अध्यक्ष कोलापुर से भगत राम छाबड़ा महिला विंग राष्ट्रीय अध्यक्ष अहमदाबाद से माया कोडनानी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमदाबाद से तुलसी टेकवानी राष्ट्रीय मंत्री अजमेर से महेंद्र तीर्थणी राष्ट्रीय महासचिव भोपाल से भगवान दास सबनानी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कोरबा से मुरलीधर माखीजा बिलासपुर से विनीता भावनानी भिलाई से सुषमा जेठानी रायपुर पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी कार्यक्रम संयोजक रामचंद खटवानी तथा नागपुर से राजेश झंबिया मुखी श्याम रूपरेला, संतराम बजाज,मुखी झामनदास बजाज,अमित जीवन,राधा राजपाल,डा तुलसी माखीजा,डा सपना जी, डा निर्मला सुनिल वाधवानी,राजू तारवानी,जे डी गोलवानी,लखमीचंद गुलवानी, अमरदास खट्टर,किशन अडवाणी सिमगा,पत्रकार विनोद मेघवानी दुर्ग आदि सैकड़ों श्रद्धालुओं ने संतों की मधुर व प्रेरणाप्रद वाणी का श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया।

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