अष्टमी तिथि पर सिंधी समाज ने मां लक्ष्मी का पर्व मनाया

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किसी भी समाज की पहचान उसकी बोली भाषा संस्कृति तीज त्यौहार व उसका पहनावा होता है । तीज त्यौहार एक दूसरे को बांधे रखते हैं जैसे-जैसे कलयुग के प्रभाव बढ़ रहा है वैसे-वैसे लोग अपने तीज -त्यौहार को भी भूलते जा रहे हैं बड़े शहरों में तो अब नाम मात्र के कुछ त्यौहार ही मनाए जाते हैं ।

छोटे शहरों में आज भी अपनी संस्कृति अपने तीज त्यौहार को बचाए रखा है । बिलासपुर शहर भी एक है वैसे भी बिलासपुर शहर को सद्भावना का प्रतीक माना जाता है । शहर में अलग.अलग मोहल्लों में रहने वाले सिंधी समाज के लोगों ने महा लक्ष्मी का पर्व शारदा भक्ति एवं सादगी के साथ मनाया

महालक्ष्मी का पर्व पितृपक्ष जिस माह में आरंभ होता है । उसी माह में मनाया जाता है 16 दिन पूर्व सगड़ा बांधा जाता है 16 दिन तक उसकी पूजा.अर्चना की जाती है घर में 16वे दिन सिंधी गुरुद्वारा यहां अपने आसपास के घर में समाज के बड़े -बुजुर्ग एक साथ इकट्ठा होकर माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं ।

उस दिन घर में सतपुड़ा सोरी ,तितुर टिक्की ,पूरी बनाए जाते हैं । सगड़ा को हल्दी के रंग में मिलाया जाता है ,16 गांठ बांधी जाती है ,16 वे दिन मां लक्ष्मी की कथा सुनी जाती है कथा समापन के बाद सगड़ा को खोला जाता है ।

वह मां लक्ष्मी के चरणों में रखा जाता है दूसरे दिन उसे विधि-विधान से नदी तालाब में सरोवर में विसर्जन किया जाता है । इस कथा का सार है कि अगर हम लोग सच्चे मन से भक्ति से श्रद्धा से भगवान की पूजा अर्चना करते हैं तो सब दुख दूर हो जाते हैं ।

भगवान की नजर में राजा हो या रंक फकीर सब एक समान है । सिंधी कॉलोनी मनोहर टॉकीज के पीछे जूना बिलासपुर में भी मोनिका सिदारा के द्वारा विधि – विधान से मां लक्ष्मी की पूजा कराई गई व कथा सुनाई गई ।

कथा समापन के बाद अरदास की गई । पल्लो पाया गया विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। लोगों ने अपने-अपने मन्नत मांगी कि मां लक्ष्मी हमारी मन्नत पूरी करें। जिसकी जो श्रद्धा होगी अगले साल मां लक्ष्मी के चरणों में वह वस्तु अर्पण करेंगे आखिर में प्रसाद वितरण किया गया ।

इस अवसर पर समाज के प्रमुख लोग उपस्थित थे । सतराम दास सिदारा ,अटल मल ,हरीश गुरमुख ,सन्मुख ,महेश, डब्बू ,जगदीश विजय दुसेजा ,जय वाधवानी ,बंटी सचदेव ,संजय गोदवा ,नीफ्रेम सबनानी ,सुमित ,मुनेश ,सोनू ,गोविंद दुसेजा नीरज मोती ,किशन

नरेश ,रवि ,हीरालाल ,संदीप ,ब्रह्मा ,नंदकिशोर ,मां कलावती दूसेजा ,शीला ,यशोदा सिदारा पूजा ,भारती ,मुस्कान ,संध्या ,लक्ष्मी ,रेखा ,कंचन ,गुंजन ,भावना ,मीना सिदरा ,रोमा ,नीलू एवं अन्य समाज की महिलाएं उपस्थित थी।

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