अनुज लक्ष्मण के साथ सीता की खोज में श्री राम पहुंचे थे शिवरीनारायण, जाने विस्तार से

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भगवान श्री राम के वनवास के विषय में अक्सर ही बातें होती है। 14 साल उन्होंने कहा गुजारे इस पर भी वाल्मिकी रामायण में वर्णन है। भगवान राम अपने नैनिहाल छत्तीसगढ़ में भी बहुत समय व्यतीत किए थे।

इस विषय में अधिक लोगों को जानकारी नहीं है। इस लेख के माध्यम से हम उस स्थान के बारे में बताने जा रहे है जहां पर भगवान राम अनुज लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज करते हुए पहुंचे थे।

भगवान राम माता सीता के हरण के बाद उनका पता लगाने के लिए वन मार्ग से ही माता शबरी तक पहुंचे थे। माता शबरी भगवान राम को जांजगीर चांपा जिला के शिवरीनारायण नामक स्थान पर मिली थी

वहां पर उनकी कुटियां थी और वहीं पर उन्होंने भगवान राम को जुठे बेर खिलाएं थे। भगवान राम के वहां जाने का प्रमाण वहां के प्राचीन मंदिरों से मिलता है।

नर-नारायण के रूप में है राम व लक्ष्मण

शिवरीनारायण में भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ पहुंचे थे। वहां पर सिर्फ राम व लक्ष्मण की ही प्रतिमा है। इतिहासकार बताते है कि जब माता सीता की खोज के लिए दोनों भाई वहां पहुंचते थे तब माता शबरी से मिले थे।

तब से ही वहां पर भगवान राम व लक्ष्मण के मंदिर है। भगवान राम व अनुज नर-नारायण के रूप में वहां पर विराजमान है।

माता सीता की कर रहे थे खोज

रामायण में भगवान राम के द्वारा अपनी पत्नी सीता के हरण हो जाने पर उसकी खोज का जिक्र है और रावण वध की भी कथा उसी से ही मिलती है।

जांजगीर के शिवरीनारायण क्षेत्र में माता सीता की खोज के लिए गए थे। जैसे रामायण में वर्णन है वैसा ही शिवरीनारायण धाम में मंदिरों की स्थापना हुई है जो भगवान राम के सीता की खोज के विशय में बताता है।

शबरी चरणों में अर्पित कर रही पुष्प

इस नर-नारायण मंदिर में मां शबरी भी है जो भगवान राम के चरणों में पुष्प अर्पित करते हुए नजर आएंगी। यह प्राचीन मंदिर है और इस मंदिर का अध्ययन करने विदेशों से भी लोग पहुंचते है।

माता शबरी की कुटिया से लेकर वह वृक्ष भी है जिसके पत्तों पर शबरी ने बेर रखकर प्रभु को खिलाए थे।

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