एक-दूसरे से बैर भाव से संबंधों में खटास आती है- मुनि पंथक

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बिलासपुर-अपने सांसारिक जीवन में कभी कभी संपर्क में आए व्यक्ति के साथ बैर भाव हो जाता है एवं कठोर व्यवहार भी हो जाता है, और समय आने पर उसका समाधान हो जाता है । लेकिन कोई व्यक्ति ऐसे अनबन या बैर को आखरी समय तक बनाए रखता है । उक्त बातें प्रवचन के माध्यम से टिकरापारा स्थित जैन भवन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कही ।


उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि दो पड़ोसी जिसके घर आजू.बाजू होने पर उसके बीच में एक दीवाल कामन थी। जिसके कारण दोनों के संबंध बिगड़ गए और प्रतिदिन वाद-विवाद के कारण अनबन बढ़ता रहा, और एक पड़ोसी का जो बुजुर्ग व्यक्ति ने अपना अंत समय महसूस कर के खुद के चारों संतानों को अपने पास बुलाया और खुद के अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि मेरी मृत्यु पश्चात बगल के पड़ोसी के घर जाना और दुखी ह्रदय से कहना कि मेरे पिता जी ने आपके साथ बिगड़ा संबंध के प्रति खेद व्यक्त किया है।

यह भी कहा कि मेरी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब मेरा पड़ोसी मेरे मृत शरीर पर चाकू से मेरे छाती में वार करें। ताकि मुझे महसूस होगी कि मेरे किए गए दुष्परिणाम की सजा मुझे मिल गई। तब वह निर्दोष सरल स्वभावी और निखालस ह्रदय वाला पड़ोसी बाजू वाले के घर जाता है और मृतक के ऊपर बैठकर छाती पर छुरी से वार करता है। तब उसका हाथ खून से रंग गया । उसका कपड़ा भी खून-खून हो गया । तभी मृतक के लड़कों ने उस निर्दोष पड़ोसी को पकड़ लिया और उसे पिता के खूनी के रूप में पुलिस के हवाले कर दिया क्योंकि ऐसा करने को भी मृतक ने अपनी संतान को अंतिम इच्छा में सिखा कर गए थे ।

इस प्रकार से तीव्र प्रकार के बैरभाव को अपने साथ में लेकर परलोक सिधारे । इसलिए परस्पर एक-दूसरे के प्रति बैरभाव को नहीं होने देना चाहिए । इसके विपरीत एक-दूसरे के प्रति प्रेम भाव अच्छे संबंध और सहायता स्वरूप होना चाहिए । जिससे कि जीवन में एक-दूसरे के प्रति सुख और आनंद बना रहे । प्रवचन के दौरान भवन में समाज के अध्यक्ष भगवान दास सुतारिया, गोपाल वेलाणी, आशा दोषी, वंदना दोषी, नेपाल चंद, पुखराज उपस्थित थे ।

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