शेष जी ने नाटकों के प्रति जड़ता को तोड़ने का कार्य किया है . डॉ पाठक

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प्रयास प्रकाशन बिलासपुर द्वारा सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ किरण राठौर द्वारा रचित शोध ग्रंथ डॉण् शंकर शेष के नाटकों का रंगमंचीय अनुशीलन का विमोचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन सम्माननीय श्री अरुण साव जी सांसद बिलासपुर लोकसभा के मुख्य आतिथ्य

न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी जी अध्यक्ष छ ग राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के विशेष आतिथ्य डॉ विनय कुमार पाठक शिक्षाविद एवं पूर्व अध्यक्ष राजभाषा आयोग छण्गण् की अध्यक्षता एवं डॉ चंद्रशेखर सिंह जी हिंदी विभागाध्यक्ष, शासकीय

महाविद्यालय मुंगेली के विशिष्ट आतिथ्य में गरिमामयी वातावरण में हॉटल सिल्वर ओक में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरूवात अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तदुपरांत मंचासीन अतिथियों का स्वागत साल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ द्वारा किरण राठौर ने किया।

प्रयास प्रकाशन बिलासपुर द्वारा ग्रंथ की रचयिता किरण राठौर का साल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर अभिनंदन किया गया जिसमे अभिनंदन पत्र का वाचन योगिता वैष्णव ने किया।

इस अवसर पर राठौर ने शोध यात्रा से लेकर संकट और समाधान की चर्चा करते हुए ग्रंथ सृजन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस बीच ऊन्हे कोरोना कर्मवीर सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

जिसमे अभिनंदन पत्र का वाचन महेश श्रीवास ने किया। आयोजन के प्रमुख अभ्यागत सम्माननीय श्री अरुण साव जी ने शोधग्रंथ के सृजन एवं प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि डॉ.किरण राठौर ने एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के नाट्य प्रयोग पर कार्य किया है। जिन्होंने रंगमंच की दुनियां में बिलासपुर को एक नई पहचान दी है।

उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार साहित्य समाज का दर्पण होता उसी प्रकार कोई रचना किसी रचनाकार का भी दर्पण होता है। उद्बोधन के इस क्रम में न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी ने ग्रंथ की सारगर्भित समीक्षा करते हुए कहा कि शंकर शेष जी के नाटक में समाज के विभिन्न पहलुओं का दर्शन है,

आज शंकर शेष जी हमारे बीच होते तो निश्चित रूप से एक अलग मुकाम पर होते, उन्होंने शंकर शेष जी की रचनाधर्मिता की प्रशंसा भी की। कार्यक्रम में अध्यक्ष की आसंदी से शिक्षाविद एवं पूर्व राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ विनय कुमार पाठक ने कहा कि हिंदी

में नृत्य नाटकों के प्रयोग के लिए डॉ.शंकर शेष ने मराठी की कीर्तन शैली और छत्तीसगढ़ी के नाच गम्मत और लोकगीतो के प्रयोग द्वारा नाटकों के प्रति जड़ता को तोड़ने का अभिनव कार्य किया है, जो प्रशंसनीय है।

विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर सिंह जी ने शोध ग्रंथ हेतु बधाई देते हुए कहा कि किरण जी ने अपनी साहित्यिक दक्षता के माध्यम से समाज को एक दिशा देने का सराहनीय एवं प्रशंसनीय कार्य किया है।

उन्होंने कोरोनाकाल में हुए साहित्य सृजन की भी तारीफ की। पूरे आयोजन का सफल संचालन राघवेंद्र दुबे ने एवं आभार प्रदर्शन सनत तिवारी ने किया। विमोचन कार्यक्रम में डॉ.गोपाल शेष, विश्वनाथ कश्यप, जितेंद्र साहू, डॉ.प्रमिला काले, राजेश सोनार, राधेश्याम

पटेल, योगेश शर्मा, आभा गुप्ता, आशा कश्यप, महेंद्र साहू, केवल कृष्ण पाठक, एम डी मानिकपुरी, डॉ उग्रसेन कन्नौजे, डॉ प्रदीप, विजय धर दीवान, डॉ.शिला राठौर, एस एल राठौर, चंपा साहू, केवल चंद्र साहू, विजय लक्ष्मी शर्मा, डॉ प्रांजल पाठक, मोहन उपाध्याय, बालमुकुंद श्रीवास विशेष रूप से उपस्थित थे।

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