छत्तीसगढ़ के लोकपर्व छेरछेरा में सेवा एक नई पहल ने निभाई अपनी दान की परंपरा

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बिलासपुर.फसल कटाई व लबालब धान भरे कोठार से एक एक मुट्ठी भरकर अपनी खुशियां बांटने का छत्तीसगढिया लोक पर्व है छेरछेरा। इस पर्व में दान का विशेष महत्व माना जाता है।

हर घर से लोग दान की परंपरा का निर्वहन करते है। इन्हीं खुशियों को दुना कर दिया समाजिक संस्था सेवा एक नई पहल ने। कोटा से आगे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के ग्राम मंझगवां में कल गांव वालो के साथ छेरछेरा पर्व मनाते हुए जरूरत मंद ग्रामीणों को गरम कपड़े, बुजुर्गो को कम्बल, महिलाओ को साड़ियां , युवतियों को सलवार सूट बच्चो को खिलौने व कपड़े व स्टेशनरी व मिष्ठान आदि वितरित कर अपने दान की परंपरा का निर्वहन किया।

इस सफल आयोजन के लिए संस्था की संयोजिका रेखा आहूजा ने संस्था के सहयोगियों शशि अग्रवाल , गौरी शंकर मिश्रा , अंजू श्रीवास्तव , विजय मोटवानी , बी प्रमिला , सुनीता जैन , शशि भारती , राकेश आडवाणी , भारती सचदेव , अंजू लाल , टिवंकल आडवाणी , सुनील तोलानी , जीत दिव्य , माधव मजूमदार , व्यंकटेश व गांव के पंच सरपंच अर्जुन जगत , प्रदीप लकरा , संत , घनश्याम व शिक्षक गण विष्णु कैवर्त का तहे दिल से आभार व्यक्त किया ।

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