बिना किसी प्रशिक्षण के सतीश ने कलाकार के रूप में बनाई अपनी पहचान, जाने विस्तार से

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सपनों को साकार करना हर कोई चाहता है, लेकिन सपने को साकार करने के लिए मेहनत, लगन व बुलंद हौसला की जरूरत होती है। जो व्यक्ति अपने मेहनत व लगन से सपने को पूरा करने में जुट जाता है। उसे सफलता मिलती ही है। ऐसे ही कहानी है शहर के युवा कलाकार सतीश यादव की।

जिन्होंने बचपन से ही अपने हुनर को निखारने का प्रयास करते हुए एक से बढ़कर एक सुंदर कल्पनाओं को रंगों में आकार दिया। वहीं लगातार मेहनत करते हुए हार नहीं मानी और अपने इस हुनर को ही अपना प्रोफेशन भी चुना है। उनके इस हुनर ने उन्हें शहर में एक पहचान दिया है।

यह पहचान बनने में कई सालों का सफर तय किया है। इनकी खास बात है कि ये लोक संस्कृति व सभ्यता से जुड़ी हुई कलाकृतियों को ज्यादा पसंद करते है और अपने पेंटिंग में इनका चित्रण भी करते है। इस लेख के माध्यम से हम कलाकार सतीश यादव के जीवन के सफर को बताएंगे।

चित्रकारी का रहा शुरू से शौक

सतीश को बचपन से ही चित्रकारी का शौक रहा। सतीश ने बताया कि जब वह बचपन में किसी भी चित्र व कलाकृति को देखता था तब वह उसे अपने हाथों से कागज पर उकेरने की कोशिश करता था। एक बार उसने जब पेन से ही मां सरस्वती का चित्र कागज पर उकेरा तब उसे देखने वाले देखकर बहुत खुश हुए। उसके बाद से ही सतीश ने चित्र व कलाकृतियां बनाना शुरू किया और उम्र के साथ ही हुनर भी निखरता गया।

अपनी कला को मानते है भगवान की देन

सतीश के माता-पिता मीना देवी यादव व राजकुमार यादव ने बताया कि सतीश को चित्रकारी का शौक बचपन से ही था। उसे किसी से प्रशिक्षण नहीं मिला है। वह शुरु से ही बहुत सुंदर चित्र बनाता था। उसका हुनर भगवान का दिया हुआ है। इसलिए सतीश अपने हुनर को खुद ही निखारते हुए आगे बढ़ रहा है।

रोजगार बनाया है हुनर को

हर व्यक्ति किसी न किसी कला में पारंगत होता है। लेकिन रोजगार के लिए वह दूसरा कार्य चुनता है। लेकिन सतीश ने अपने हुनर को ही रोजगार का माध्यम चुना है। जिसके लिए वह खुद को बहुत ही खुशनसीब मानकर कार्य करता है। क्योंकि हर कोई इस तरह से आगे नहीं बढ़ सकता है। इस कार्य को करने में सतीश के माता-पिता व भाई बहन सभी का सहयोग मिला।

कई पुरस्कारों से हुए सम्मानित

सतीश को हर मंच में सराहना मिली है। सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी सतीश ने छत्तीसगढ़ व शहर का मान बढ़ाया है। दिल्ली के कलाकार फाउंडेशन के द्वारा सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं यहां पर उन्होंने लाइव आर्ट भी बनाया।

इसके साथ ही दिल्ली के प्रगति मैदान में भी विश्व पर्यावरण दिवस पर वल्र्ड रिकाॅर्ड बनाने शामिल हुए। सेल्फ एग्जीबिशियन भी लगाएअपने चित्रों की प्रदर्शनी कई बार लगाया है। जिसमें अग्रसेन चैक के क्राॅस स्क्वेयर कैंफे, लिपान आर्ट गैलेरी में एग्जीबिशियन लगाए है।

खुद की है आर्ट गैलेरी

सतीश ने बताया कि सरकण्डा क्षेत्र में ही खुद की आर्ट गैलेरी लिपान नाम से है। जहां पर अलग-अलग तरह के चित्रों की प्रदर्शनी लगाए हुए है। वहीं यहां पर वे बच्चों को प्रशिक्षण भी देते है।

हर तरह की पेंटिंग बनाते है

सतीश एक कलाकार के तौर पर पूर्ण रूप से पारंगत है। जिसमें उन्होंने लोक संस्कृति में बस्तर आर्ट के वनवासियों का चित्रण, जगार, भित्ती चित्र, मधुबनी, वारली जैसे कई तरह के लोक चित्रकला और इसके अलावा वाल पेंटिंग, म्यूरल आर्ट को ज्यादा प्राथमिकता देते हुए बनाते है। इसके साथ ही लोगों के तस्वीर को हूबहू पेंटिंग में बनाते है।

वाल पेंटिंग में मशहूर

सतीश वाॅल पेंटिंग का कार्य भी करते है। जिसमें उन्होंने शहर के कई कैफे में इंटिरियर चित्रकारी की है। जिसमें मिस्टर चाऊ, क्रास स्क्वेयर कैफे जैसे कैफे को चित्रकारी से सजाया है। वहीं कुछ स्कूलों में सुंदर-सुंदर चित्रकारी से खास रूप दिया है।

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रंगोली व मेहंदी में भी खास रूचि

सतीश चित्रकारी के साथ ही फैशन डिजाइन का कार्य करते है। इसके साथ ही रंगोली बनाने व मेहंदी लगाने में भी काफी रूचि लेते है। कई प्रोग्राम में रंगोली तैयार की है और दूल्हों के लिए फेस वाले मेहंदी भी बनाए है।

समसामयिक विषयों पर बनाते है पेंटिंग

सतीश की खास बात यह भी है वे समसामयिक विषयों पर भी पेंटिंग बनाते है। जिसमें अयोध्या राममंदिर निर्माण, नवरात्रि, कोरोना में लाॅकडाउन, महिला दिवस, मदर्स डे जैसे खास दिनों पर भी सुंदर पेंटिंग से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

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