आत्म संयम रखे और प्रभु का चिंतन करे श्रद्धालु-पंडित अमर कृष्ण

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बिलासपुर.आत्म संयम रखें और प्रभु का चिंतन करें। चिंता करे तो मिले बीमारी चिंतन करे तो मिले बिहारी। हमारे पास धर्मग्रन्थ तो हैं पर माथे से लगाकर अपने घर में सुसज्जित करके रखते हैं जबकि हम उनका वास्तविक लाभ तभी उठा पाएगें जब हम

उनका अध्ययन, चिन्तन, मनन करके उन्हें अपने जीवन में उतारेगें। हम हमारे ग्रन्थों की वैज्ञानिकता को समझे ए हमारे त्यौहारो की वैज्ञानिकता को समझे और अनुसरण करे। यह बातें आचार्य पंडित अमर कृष्ण ने सोशल मीडिया के माध्यम से राम कथा वाचन के दौरान लोगों से कही।

रीना संजीव श्रीवास्तव विजियापुरम द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजित श्री राम कथा के पंचम दिवस श्री राम के जन्मोत्सव और बाल लीलाओं का बड़ा ही मनमोहक चित्रण किया।

सुनकर ऐसा लग रहा था मानो छोटे से राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न सामने ही ठुमक-ठुमक कर चल रहे हैं। अपनी रोज़ की बाल लीलाओं से राम पिता दशरथ और तीनों माताओं समेत समस्त अयोध्यावासियों का मनमोह लेते थे।

प्रभु की बाल लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार माता कौशल्या ने श्री रामचन्द्रजी को स्नान कराया और श्रृंगार करके अपने इष्टदेव भगवान की पूजा करके नैवेद्य चढ़ाया, जहां रसोई बनाई गई थी।

फिर माता पूजा के स्थान पर लौटी वहां पुत्र राम को भोजन करते देखा। माता भयभीत होकर पुत्र के पास गई, तो वहां बालक को सोया हुआ देखा। फिर देखा कि वही पुत्र वहां भोजन कर रहा है।

उनके हृदय में कंपन होने लगा। वह सोचने लगी कि यहां और वहां मैंने दो बालक देखे। यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या और कोई विशेष कारण है माँ बहुत घबराई हुई हैं। लेकिन भगवान माँ को देख कर मुस्कुरा दिए हैं।

फिर भगवान ने माँ को अपना अद्भुत रूप का दर्शन कराया है। जिसके एक.एक रोम में करोड़ों ब्रह्माण्ड लगे हुए हैं। अगणित सूर्य, चन्द्रमा, शिव, ब्रह्मा, बहुत से पर्वत, नदियाँ, समुद्र, पृथ्वी, वन, काल, कर्म, गुण, ज्ञान और स्वभाव देखे और वे पदार्थ भी देखे जो कभी सुने भी न थे।

भगवान की माया दर्शन करके माँ डर गई है और हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई है। माँ ने आज जीव को देखा, जिसे वह माया नचाती है और फिर भक्ति को देखा, जो उस जीव को माया से छुड़ा देती है।

माँ को आश्चर्यचकित देखकर भगवान राम फिर से छोटे से बालक बन गए है। राम जी ने ये आदर्श प्रस्तुत किया जिससे आज के बच्चों को शिक्षा लेनी चाहिए। क्योंकि ये तीनो ही हैं

पूरी दुनिया में जो निःस्वार्थ भाव से प्रेम करते हैं, और उनके चरणों में झुकने के बाद इंसान को कहीं ओर नही झुकना पड़ता, उनका दिया आशीर्वाद अवश्य फलीभूत होता है।

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