माता सीता के 108 नामों का पाठ करने से होगा हर समस्या का समाधान

माता सीता के 108 नाम

ऊं जनकनन्दिन्यै नमः।

ऊं लोकजनन्यै नमः।

ऊं जयवृद्धिदायै नमः।

ऊं जयोद्वाहप्रियायै नमः।

ऊं रामायै नमः।

ऊं लक्ष्म्यै नमः।

ऊं जनककन्यकायै नमः।

ऊं राजीवसर्वस्वहारिपादद्वयाज्चितायै नमः।

ऊं राजत्कनकमाणिक्यतुलाकोटिविराजितायै नमः।

ऊं मणिहेमविचित्रोद्यत्रुस्करोत्भासिभूषणायै नमः।

ऊं नानारत्नजितामित्रकाज्चिशोभिनितम्बिन्यै नमः।

ऊं देवदानवगंधर्वयक्षराक्षससेवितायै नमः।

ऊं सकृत्प्रपन्नजनतासंरक्षणकृतत्वरायै नमः।

ऊं एककालोदितानेकचन्द्रभास्करभासुरायै नमः ।

ऊं द्वितीयतटिदुल्लासिदिव्यपीताम्बरायै नमः।

ऊं त्रिवर्गादिफलाभष्टदायिकारुण्यवीक्षायै नमः।

ऊं चतुर्वर्गप्रदानोद्यत्करपड़जशोभितायै नमः।

ऊं पंचयज्ञपरानेकयोगिमानसराजितायै नमः।

ऊं षाड्गुण्यपूर्णविभवायै नमः।

ऊं सप्ततत्वादिदेवतायै नमः।

ऊं अष्टमीचन्द्ररेखाभचित्रकोत्भासिनासिकायै नमः।

ऊं नवावरणपूजितायै नमः।

ऊं रामानन्दकरायै नमः।

ऊं रामनाथायै नमः।

ऊं राघवनन्दितायै नमः।

ऊं रामावेशितभावायै नमः।

ऊं रामायत्तात्मवैभवायै नमः।

ऊं रामोत्तमायै नमः।

ऊं राजमुख्यै नमः।

ऊं रंजितामोदकुन्तलायै नमः।

ऊं दिव्यसाकेतनिलयायै नमः।

ऊं दिव्यवादित्रसेवितायै नमः।

ऊं रामानुवृत्तिमुदितायै नमः।

ऊं चित्रकूटकृतालयायै नमः।

ऊं अनुसूयाकृताकल्पायै नमः।

ऊं अनल्पस्वांतसंश्रितायै नमः।

ऊं विचित्रमाल्याभरणायै नमः।

ऊं विराथमथनोद्यतायै नमः।

ऊं श्रितपंचवटीतीरायै नमः।

ऊं खदयोतनकुलानन्दायै नमः।

ऊं खरादिवधनन्दितायै नमः।

ऊं मायामारीचमथनायै नमः।

ऊं मायामानुषविग्रहायै नमः।

ऊं छलत्याजितसौमित्रै नमः।

ऊं छविनिर्जितपड्कजायै नमः।

ऊं तृणीकृतदशग्रीवायै नमः।

ऊं त्राणायोद्यतमानसायै नमः।

ऊं हनुमद्दर्शनप्रीतायै नमः।

ऊं हास्यलीलाविशारदायै नमः।

ऊं मुद्रादर्शनसंतुष्टायै नमः।

ऊं अशोकवनिकावासायै नमः।

ऊं निश्शोकीकृतनिर्जरायै नमः।

ऊं लंकादाहकसड्कल्पायै नमः।

ऊं लंकावलयरोधिन्यै नमः।

ऊं शुद्धिकृतासंतुष्टायै नमः।

ऊं शुमाल्याम्बरावृतायै नमः।

ऊं संतुष्टपतिसंस्तुतायै नमः।

ऊं संतुष्टहृदयालयायै नमः।

ऊं श्वशुरस्तानुपूज्यायै नमः।

ऊं कमलासनवंदितायै नमः।

ऊं अणिमाद्यष्टसंसिद्ध नमः।

ऊं कृपावाप्तविभीषणायै नमः।

ऊं दिव्यपुष्पकसंरूढायै नमः।

ऊं दिविषद्गणवंदितायै नमः।

ऊं जपाकुसुमसंड्काशायै नमः।

ऊं दिव्यक्षौमाम्बरावृतायै नमः।

ऊं दिव्यसिंहासनारूढायै नमः।

ऊं दिव्याकल्पविभूषणायै नमः।

ऊं राज्याभिषिक्तदयितायै नमः।

ऊं दिव्यायोध्याधिदेवतायै नमः।

ऊं दिव्यगंधविलिप्तांड्ग्यै नमः।

ऊं दिव्यावयवसुंदर्यै नमः।

ऊं हयडंगवीनहृदयायै नमः।

ऊं हर्यक्षगणपूजितायै नमः।

ऊं घनसारसुगंधढ्यायै नमः।

ऊं घनकुंज्चितमूर्धजायै नमः।

ऊं चंद्रिकास्मितसम्पूर्णायै नमः।

ऊं चारूचामीकराम्बरायै नमः।

ऊं योगिन्यै नमः।

ऊं मोहिन्यै नमः।

ऊं स्तम्भिन्यै नमः।

ऊं अखिलाण्डेश्वर्यै नमः।

ऊं शुभायै नमः।

ऊं गौर्य नमः।

ऊं नारायण्यै नमः।

ऊं प्रीत्यै नमः।

ऊं स्वाहायै नमः।

ऊं स्वधायै नमः।

ऊं शिवायै नमः।

ऊं आश्रितानंदजनन्यै नमः।

ऊं भारत्यै नमः।

ऊं वाराहौः नमः।

ऊं वैष्णव्यै नमः।

ऊं ब्राहम्यैः नमः।

ऊं सिद्धवंदितायै नमः।

ऊं षढाधारनिवासिन्यै नमः।

ऊं कलकोकिलसल्लापायै नमः।

ऊं कलहंसकनूपुरायै नमः।

ऊं क्षांतिशान्त्यादिगुणशालिन्यै नमः।

ऊं कन्दर्पजनन्यै नमः।

ऊं सर्वलोकसमारध्यायै नमः।

ऊं वसुधापु़त्रयै नमः।

ऊं मातंड्ग्यै नमः।

ऊं सीतायै नमः।

ऊं हेमांजनायिकायै नमः।

ऊं सीतादेवीमहालक्ष्म्यै नमः।

ऊंसकलसांराज्यलक्ष्म्यै नमः।

ऊं भक्तभीष्टफलप्रदायै नमः।

।। इति श्रीसीताष्टोत्तरश्ज्ञतनामावलिः सम्पूर्णा।।

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