राज्य मानसिक कोविड अस्पताल से डिस्चार्ज हुए लोगों की दोबारा की जा रही काउंसलिंग

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बिलासपुर. सेंदरी स्थित राज्य मानसिक चिकित्सालय में बनाए गए राज्य मानसिक कोविड चिकित्सालय से डिस्चार्ज हुए मानसिक रोगियों की फिर से काउंसलिंग की जा रही है।

राज्य मानसिक चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डॉ. बीआर नंदा के निर्देश पर यहां के मनोवैज्ञानिक दिनेश कुमार लहरी सभी मरीजों से टेलीफोनिक व आडियो विजुअल माध्यम से संपर्क कर रहे हैं।

वह न सिर्फ लोगों के वर्तमान हालत बल्कि उनके पूर्व की हिस्ट्री को भी खंगाल रहे हैं। ऐसा करके वह कोविड से ठीक हुए मरीजों के मानसिक रोग को फिर से ठीक करने पर लग गए हैं।

इस कार्य में उनके साथ मनोरोग चिकित्सकों की टीम भी लगी हुई है। डॉ. लहरी ने बताया जो मानसिक रोगी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए थे उन्हें पूरे राज्य

से लाकर राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी में बनाए गए कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब तक यहां 42 कोरोना पॉजिटिव मानसिक रोगियों का इलाज किया जा चुका है।

यहां से डिस्चार्ज होने के बाद उनके मानसिक रोग का इलाज ठीक से चल रहा है कि नहीं। दोबारा कोरोना संक्रमण बढ़ने से कहीं उनकी मानसिक बीमारी बढ़ तो नहीं गई है।

उनके जीवन जीने यानि डेली का क्रिया कलाप सही चल रहा है कि नहींए यह जानने के लिए उनकी दोबारा काउंसलिंग की जा रही है।

वर्तमान में राज्य के ऐसे 22 मानसिक रोगियों की काउंसलिंग की जा रही है। इसके बाद अन्य मरीजों की काउंसलिंग की जाएगी।

दोबारा की जा रही इस काउंसलिंग के कार्य को एक रणनीति के तहत किया जा रहा है। इसमें मनोरोग चिकित्सकों की भी ड्यूटी लगाई गई है। डॉ. लहरी सबसे पहले ऑनलाइन माध्यम से मरीजों की काउंसलिंग करते हैं।

इस दौरान यदि किसी मरीज में मानसिक बीमारी बढ़ी हुई लगी या कुछ अन्य समस्या हुई तो वह मनोरोग चिकित्सकों को यह केस सौंपते हैं।

इसके बाद मरीज को राज्य मानसिक चिकित्सालय में बुलाकर उसका इलाज किया जा रहा है। रोजोना 15-16 मरीजों की काउंसलिंग कर उनका फोलोअप लिया जा रहा है।

अभी जब 22 मरीजों की काउंसलिंग का कार्य पूरा हो जाएगा तो इसके बाद शेष बचे हुए 20 मरीजों की भी काउंसलिंग शुरू की जाएगी।

इस दौरान उनके परिजनों को बताया गया है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो वह कभी संपर्क कर सकते हैं।

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