पुरुषोत्तम मास के अवसर पर सोशल मीडिया पर शुरू हुई राम कथा

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बिलासपुर. आचार्य अमर कृष्ण शुक्ला के मुख से श्री राम कथा का आयोजन 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक रीना संजीव श्रीवास्तव द्वारा किया जा रहा है। आज की कोरोना की परिस्थिति को देखते हुए आयोजन को सोशल डिस्टेनसिंग को ध्यान रखते हुए फेसबुक पर लाइव किया जा रहा है।

आज कोरोना ने सब की कार्यशैली में परिवर्तन ला दिया है। सबके अपने कार्य प्रारंभ हो गए किंतु अभी हमारे धार्मिक आयोजन सुरक्षा की दृष्टि से नहीं किये जा रहे ऐसे में ये सोशल मीडिया द्वारा संभव हो पा रहा है।

रीना संजीव श्रीवास्तव व उनके परिवार के कुछ सदस्य भी इस बीमारी के शिकार हो गए थे जो ईश्वर की कृपा से अब सुरक्षित हैं और उसी का धन्यवाद करने हेतु राम कथा का आयोजन किया जा रहा ताकि जो अन्य लोग भी घर में इसका लाभ प्राप्त करें और इस बीमारी से लड़ने के लिए सकारात्मक विचार मन मे बने रहें।

ईश्वर पूरे विश्व की इस महामारी से अब मुक्त करे यही प्रार्थना है संजीव रीना श्रीवास्तव व महाराज जी की। आज कथा के प्रथम दिवस व्यास पूजन के साथ मंगलाचरण करके तुलसीदास जी का जीवन परिचय दिया।

हिन्दू धर्म मे रामायण का महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें भगवान विष्णु के रामावतार को वर्णित किया है। अमर शुक्ला जी ने तुलसीदास जी का परिचय देते हुए बताया कि महान कवि तुलसीदास जी की प्रतिभा किरणों से ना केवल हिन्दू समाज और भारत बल्कि समस्त संसार अलौकिक हो रहा है।

इन्हें महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। उनका जन्म श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था। उनकी पत्नी का नाम रत्नावली था। पत्नी ने तुलसीदास से कहा हाड़ मांस को देह मम तापर जितनी प्रीति। तिसु आधो जो राम प्रतिए अवसि मिटिहि भवभीति।।

अर्थात् जितनी आसक्ति मेरे हांड़.मांस की देह से हैए उसकी आधी भी भगवान राम के प्रति होती तो भव सागर पार हो जाते। रामचरित मानस रूपी नाव पर हम यदि सवार हो गए तो इस भवसागर से पार होना निश्चित है।

कृष्ण की लीला से हम सीख सकते हैं लेकिन अनुसरण नहीं कर सकते क्योंकि उनकी कुछ लीला ऐसी है जो एक साधारण इंसान कर भी नही सकता। लेकिन श्री राम का चरित्र तो ऐसा है जिसे हमें अपने जीवन मे उतारना चाहिए।

गोस्वमी जी ने तो कहा है कि कहहि सुनहि अनुमोदन करही। राम के चरित्र को तो गाना चाहिए, सुनना चाहिए, अनुमोदन अनुसरण करना चाहिए। हर कोई इस मार्ग पर चल भी नही सकता तुलसीदास जी ने तो कहा जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करही सब

कोई हमारे चार प्रमुख ग्रंथ है रामायण जो हमे जीना सिखाती हैए महाभारत रहना सिखाती है, गीता हमे कर्म करना और भागवत जी हमे मरना सिखाती है। रामायण हमे जीना सिखाती है।

आज हम जीना ही सीखना ज़रूरी है। रामचरितमानस का तो हर चरित्र ही अनुसरणीय है। ये कथा हमे मुक्ति प्रदान करती है। कई बार हम चाहते तो हैं कि हमे मुक्ति मिले लेकिन जब वो पल मिलता है हम पीछे हट जाते हैं हम उसे प्राप्त नही कर पाते।

एक बार महात्मा बुद्ध के पास 1 व्यक्ति आया और मुक्ति की प्रार्थना की एमहात्मा ने कहा ठीक है मैं तुझे मुक्ति प्रदान कर देता हूँ ,लेकिन व्यक्ति बोला मुझे अकेले नही चाहिए मै तो चाहता हूं कि पूरे गाँव को मुक्ति मिलनी चाहिये।

बुद्ध बोलये ठीक है कल पूरे गांव को ले आओ मैं कल सबको मुक्ति प्रदान करूँगा। वो व्यक्ति सब के द्वार पर खटखटाया सब को बोला महात्मा बुद्ध आये हैं मुक्ति प्रदान करने सब चलो, लेकिन सब ने कोई बहाना बना कर जाने से मना कर दिया।

अगले दिन बुद्ध इंतेज़ार करते रहे वो व्यक्ति भी नही आया। इस प्रकार उस व्यक्ति ने सब के कारण अपने उस मुक्ति के पल को भी गवां दिया। जब भी हमे मंदिर या कथा में जाने के अवसर मिले तुरंत चले जाना चाहिए एसब के चलते अपनी मुक्ति का पल ना खो दें।

यदि जीवन मे आंनद चाहिए तो कथा से अधिक आनंद कहीं नही मिलेगा। जब प्रभु की कृपा होती है तभी संत का हमारे जीवन मे आते हैं। मीरा जी ने गाया है पायो जी मैने राम रतन धन पायो, खर्चे ना खूटे चोर ना लूटे दिन दिन बढ़त सवायो। ये राम नाम है ही ऐसा।

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